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UGC के Controversial नियमों पर Supreme Court का ‘स्टे’, Akhilesh Yadav बोले- कानून का उद्देश्य स्पष्ट हो

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूएनआई) के नए समानता संबंधी नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, क्योंकि वे एक अधिक एकीकृत समाज के लिए प्रयासरत हैं। अखिलेश यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं करता; माननीय न्यायालय ने ठीक यही सुनिश्चित किया है। कानून की भाषा स्पष्ट होनी चाहिए, और उसका उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए। यह केवल नियमों की बात नहीं है, बल्कि उद्देश्य की भी बात है। किसी पर अत्याचार न हो, किसी के साथ अन्याय न हो। किसी पर ज़ुल्म या अत्याचार न हो, किसी के साथ अन्याय न हो।
 

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 में सामान्य वर्ग के खिलाफ कथित “भेदभाव” को लेकर देश भर में मचे बवाल के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इन विनियमों पर रोक लगा दी। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि फिलहाल 2012 के यूजीसी विनियम लागू रहेंगे। न्यायालय ने कहा कि विनियम 3 (सी) (जो जाति-आधारित भेदभाव को परिभाषित करता है) में पूरी तरह अस्पष्टता है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा, “भाषा में संशोधन की आवश्यकता है।”
23 जनवरी को अधिसूचित नए यूजीसी विनियमों को विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने ‘मनमाना, बहिष्करणकारी, भेदभावपूर्ण’ बताते हुए और संविधान तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करने वाला बताते हुए चुनौती दी थी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के तहत संस्थानों को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियां और हेल्पलाइन स्थापित करने की आवश्यकता है।
 

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अधिकांश सामान्य वर्ग के छात्रों ने उन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जो परिसरों में समानता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। छात्रों ने बताया कि इस नियम में सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ दर्ज फर्जी शिकायतों के समाधान का कोई प्रावधान नहीं है।

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