Breaking News

Delhi Mosquito Surge: मानसून में बढ़ रहा Dengue और Malaria का Threat, जानें कब हों Hospitalized

बरसात के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा अधिक बढ़ जाता है। हर साल डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के कारण बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं। मानसून का समय डेंगू-मलेरिया की बीमारी चरम पर होती है। कई बार तो इन बीमारियों के लक्षण भी समझ नहीं आते हैं, जब हालात ज्यादा बिगड़ जाती हैं, तो लोग अस्पताल में भर्ती होते, तब पता चलता है कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के शिकार हो गए हैं।
राजधानी दिल्ली-एनसीआर के आंकड़े बता रहे हैं कि मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम फिर से बढ़ने लगा है। अगस्त के महीने में दिल्ली में डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले सामने आए थे। वहीं, अगस्त में डेंगू के 11 मामले आए। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि इन दिनों बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगने या फिर सांस से संबंधित किसी भी तरह की दिक्कत को जरा भी इग्नोर न करें। 
मलेरिया के खतरे को लेकर अलर्ट
अचानक से तेज बुखार, ठंड लगना और कंपकंपी के साथ पसीने आने जैसे लक्षण को लोग जनरल वायरल मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। आइए आपको इनके लक्षण बताते हैं-
 – मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
 – डॉक्टरों के अनुसार इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और ठंड लगने की समस्या हो सकती हैं।
 – मलेरिया में सबसे जरुरी है समय पर जांच और सही इलाज होना।
 – यदि समय पर बीमारी का पता लग जाए और इलाज हो जाए तो मलेरिया की जटिलताओं को काफी कम किया जा सकता है।
मलेरिया का शक है तो क्या करें?
 – अगर आपको मलेरिया के लक्षण हैं या फिर बीमारी का शक है तो डॉक्टर की सलाह पर तुरंत जांच कराएं। बिना जांच के खुद से एंटी-मलेरियल दवा शुरु नहीं करनी है। सही समय पर जांच कराएं और सही इलाज की मदद से आप गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
 –  दवाई शुरु होने के बाद बुखार या अन्य लक्षण कम होने लगे तो इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद कर दें। दरअसल, एंटी-मलेरियल उपचार बीमारी के प्रकार और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। इसलिए दवा की मात्रा, अवधि या कॉम्बिनेशन में बदलाव खुद से नहीं करना चाहिए।
 – गंभीर मलेरिया में चेतना व व्यवहार में काफी बदलाव आता है, जैसे कि दौरे पड़ने, अधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, गंभीर एनीमिया और कई अंगों के काम पर असर दिखता है।
 – रोगी को बार-बार उल्टी होगी और पेशाब बिल्कुल कम आना, रक्तस्राव, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या बेहोशी जैसे संकेत नजर आएंगे। इन लक्षणों में बिन समय गंवाए बजाय तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, पाच साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ अन्य उच्च खतरा वाले लोगों में गंभीर मलेरिया का खतरा देखने को मिलता है।
 – मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल, मच्छर के संपर्क से बचने के उपाय करते रहना जरुरी है। 

Loading

Back
Messenger