शतरंज की दुनिया में आर प्रज्ञानानंद की हालिया सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बड़े खिलाड़ी अपनी कमजोरियों को पहचानकर किस तरह खुद को बदल सकते हैं। ग्रैंड चेस टूर फाइनल में फैबियानो करूआना को हराकर खिताब जीतने वाले प्रज्ञानानंद को लेकर अब दिग्गज खिलाड़ी लेवोन अरोनियन और विश्वनाथन आनंद ने भी खुलकर तारीफ की है।
गौरतलब है कि करीब एक साल पहले ग्रैंड चेस टूर फाइनल में तीसरे स्थान के मुकाबले में लेवोन अरोनियन ने प्रज्ञानानंद को हराया था। उस मुकाबले में तेज गति से खेले जाने वाले खेल के दौरान अरोनियन ने प्रज्ञानानंद के खेल को करीब से समझा और उन्हें लगा कि तेज खेल में भारतीय खिलाड़ी की कुछ कमजोरियां हैं। अरोनियन के मुताबिक तब उन्हें लगा था कि तेज और बहुत तेज शतरंज में प्रज्ञानानंद को दबाव में लाया जा सकता है।
लेकिन एक साल के भीतर तस्वीर काफी बदल गई। सेंट लुइस में हुए ग्रैंड चेस टूर फाइनल में प्रज्ञानानंद ने फैबियानो करूआना को 15-13 से हराकर इतिहास रच दिया। वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय और कुल सातवें खिलाड़ी बने। इस जीत के साथ उन्हें दो लाख डॉलर की पुरस्कार राशि भी मिली।
प्रज्ञानानंद की जीत की खास बात यह रही कि उन्होंने वही क्षेत्र मजबूत किया, जिसे कभी उनकी कमजोरी माना गया था। फाइनल में उन्होंने दोनों तेज मुकाबले जीते और इसके बाद चार मुकाबलों वाले बहुत तेज चरण को 4-4 की बराबरी पर खत्म किया। इसी प्रदर्शन ने उन्हें खिताब दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
लेवोन अरोनियन ने माना कि प्रज्ञानानंद ने पिछले एक साल में तेज और बहुत तेज खेल में काफी सुधार किया है। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी अपनी कमजोरी को दूर करने के लिए मेहनत करता है तो उसकी तारीफ करनी चाहिए। अरोनियन ने प्रज्ञानानंद को संघर्ष करने वाला और पसंद आने वाला खिलाड़ी भी बताया।
मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रज्ञानानंद की प्रगति पर नजर रखने वाले दिग्गज विश्वनाथन आनंद भी उनसे बेहद प्रभावित हैं। आनंद ने हाल में उन्हें मौजूदा समय का दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी तक बताया। हालांकि, उन्होंने यह राय किसी आधिकारिक विश्व रैंकिंग के आधार पर नहीं, बल्कि हाल के टूर्नामेंटों में प्रज्ञानानंद के प्रदर्शन को देखते हुए रखी है।
आनंद ने बताया कि नॉर्वे शतरंज प्रतियोगिता में एक समय प्रज्ञानानंद सबसे निचले स्थानों में थे और केवल चार मुकाबले बाकी थे। इसके बाद उन्होंने लगातार चार जीत दर्ज कर पूरी तस्वीर बदल दी। ग्रैंड चेस टूर में भी उन्होंने तेज मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और बहुत तेज मुकाबलों में जरूरी नतीजे हासिल कर खिताब अपने नाम किया।
प्रज्ञानानंद की सबसे बड़ी खूबी अब दबाव के बीच वापसी करने की क्षमता मानी जा रही है। विश्वनाथन आनंद के अनुसार, किसी प्रतियोगिता के आखिरी दौर में लगातार जीत हासिल कर पूरी स्थिति बदल देना बेहद दुर्लभ गुण है। यही क्षमता प्रज्ञानानंद को दूसरे शीर्ष खिलाड़ियों से अलग बनाती दिखाई दे रही है।
लेवोन अरोनियन की पुरानी टिप्पणी और अब उनकी प्रशंसा इस बदलाव की कहानी को और खास बनाती है। जिस कमजोरी को कभी उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया था, उसी क्षेत्र में प्रज्ञानानंद ने सुधार करके सबसे बड़े मंच पर अपनी ताकत दिखाई है। हाल के परिणामों को देखते हुए इतना साफ है कि भारतीय शतरंज का यह युवा सितारा लगातार खुद को बेहतर कर रहा है और आने वाले वर्षों में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बने रहने वाले हैं।