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WPL Final: 103 डिग्री बुखार में Smriti Mandhana का जलवा, RCB ने जीती दूसरी Trophy.

महिला प्रीमियर लीग के फाइनल में स्मृति मंधाना ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए उस वक्त मोर्चा संभाला, जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 204 रन के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए मंधाना ने सिर्फ 41 गेंदों में 87 रन की तूफानी पारी खेली।
गौरतलब है कि यह पारी इसलिए और खास मानी जा रही है क्योंकि फाइनल से एक रात पहले स्मृति मंधाना तेज बुखार से जूझ रही थीं। मौजूद जानकारी के अनुसार उनका तापमान 103 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने फाइनल खेलने का फैसला किया और मैदान पर उतरकर मैच का रुख ही बदल दिया।
आरसीबी ड्रेसिंग रूम में कोच मलोलन रंगराजन ने फाइनल से पहले पूरी टीम को मंधाना की तबीयत के बारे में बताया था। उन्होंने कप्तान की तारीफ करते हुए कहा कि स्मृति ने बिना किसी शिकायत के खुद को फिट करने की पूरी कोशिश की और टीम के लिए उपलब्ध रहीं। कोच के शब्दों में यह सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि नेतृत्व और प्रतिबद्धता की मिसाल है।
मैच में मंधाना को जॉर्जिया वोल का भरपूर साथ मिला। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 165 रन की साझेदारी कर दिल्ली के गेंदबाज़ों पर जबरदस्त दबाव बनाया हैं। वोल ने भी 79 रन की अहम पारी खेली, जिससे लक्ष्य का पीछा आसान होता नजर आया। हालांकि दोनों बल्लेबाज़ सेट होने के बाद आउट हो गईं, जिससे मुकाबला आखिरी ओवर तक खिंच गया।
अंतिम ओवर में आरसीबी को 10 रन चाहिए थे और क्रीज पर राधा यादव और नादिन डी क्लार्क मौजूद थीं। राधा ने दबाव में संयम दिखाते हुए लगातार दो चौके लगाए और टीम को जीत दिला दी। जैसे ही जीत पक्की हुई, मंधाना डगआउट में खुशी से उछलती नजर आईं और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगा लिया।
इस खिताबी जीत के साथ आरसीबी ने दूसरी बार महिला प्रीमियर लीग ट्रॉफी अपने नाम की हैं। यह सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले एलिस पेरी निजी कारणों से बाहर हो गई थीं। इसके बावजूद टीम ने संतुलित प्रदर्शन किया और खिताब तक का सफर तय किया हैं।
पूरे टूर्नामेंट में मंधाना का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने नौ मैचों में 377 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज़ रहीं हैं। फाइनल के बाद मंधाना ने एक बार फिर आरसीबी के समर्थकों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि हर मैदान पर उन्हें जिस तरह का समर्थन मिलता है, वह टीम को खास बनाता हैं।
बीमारी, दबाव और बड़े मंच के बावजूद स्मृति मंधाना की यह पारी सिर्फ एक मैच जिताने वाली पारी नहीं रही, बल्कि यह बताती है कि क्यों वह भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद कप्तानों में गिनी जाती हैं और क्यों आरसीबी की यह जीत लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

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