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The Telegraph के पूर्व संपादक R Rajagopal का पासपोर्ट फंसा, Kerala CM ने Suvendu Adhikari से की अपील

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर ‘द टेलीग्राफ’ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट रिन्यूअल के मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है। बताया जा रहा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण पुलिस वेरिफिकेशन में नेगेटिव रिपोर्ट आने की वजह से उनका आवेदन रुका हुआ है। 29 जून को लिखे अपने पत्र में सतीसन ने कहा कि राजगोपाल का पासपोर्ट रिन्यूअल का आवेदन कोलकाता पुलिस की नेगेटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट के कारण रुका हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पता चला है कि प्रतिकूल रिपोर्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से राजगोपाल का नाम हटाए जाने पर आधारित है। उन्होंने आगे कहा कि चुनावी मामले को उचित अपील प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन पुलिस रिपोर्ट के कारण पासपोर्ट के नवीनीकरण में देरी हुई है। अधिकारी से हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए सतीशान ने लिखा, इन परिस्थितियों में मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस मामले को तत्काल देखें। इस पत्र में राजगोपाल को फ्लैट 3A, 12 डोवर रोड, कलकत्ता का निवासी बताया गया है और उनके पासपोर्ट रिन्यूअल एप्लीकेशन का फाइल नंबर भी दिया गया है।

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‘जाने-माने पत्रकार’

सथीसन ने राजगोपाल को एक जाने-माने पत्रकार बताया, जो “पिछले तीन दशकों से कोलकाता में काम कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है पत्रकारिता में उनका करियर तीन दशकों से भी ज़्यादा लंबा और शानदार रहा है, जिसमें ‘द टेलीग्राफ’ के संपादक के तौर पर काम करना भी शामिल है। केरल के मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राजगोपाल, प्रोफ़ेसर वी रामदास के बेटे हैं। प्रोफ़ेसर रामदास केरल में गांधी स्मारक निधि के राज्य सचिव थे और जनसेवा के लिए उनका बहुत सम्मान किया जाता था। सथीसन ने पत्र के साथ राजगोपाल की संपर्क जानकारी भी भेजी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले पर जल्द से जल्द ध्यान दिया जाए।

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थरूर ने सतीसन के पत्र का समर्थन किया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सतीसन के दखल का समर्थन करते हुए कहा कि राजागोपाल जैसे मामलों में सभी राजनीतिक दलों के समर्थन की ज़रूरत होती है। एक्स पर मुख्यमंत्री का पत्र शेयर करते हुए थरूर ने लिखा, यह एक मुख्यमंत्री की ओर से दूसरे मुख्यमंत्री के लिए एक अहम पहल है। बेशक, इसका जवाब यही मिलेगा कि यह केंद्र सरकार का मामला है और राज्य सरकार इसे नहीं देख सकती। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन सच तो यह है कि जब भी न्याय में इस तरह की गंभीर चूक होती है, तो सभी लोकतांत्रिक भारतीयों को पीड़ितों के समर्थन में एकजुट होना चाहिए, ताकि जल्द से जल्द कोई उचित समाधान निकल सके। थरूर ने यह भी कहा कि राजागोपाल का मामला कोई अकेला मामला नहीं है। उन्होंने लिखा कि ऐसे मामले (SIR अधिकारियों की तरफ़ से सामान्य समझ की भारी कमी वाले और भी मामले सामने आए हैं) सरकार के लिए लगातार अनावश्यक शर्मिंदगी का कारण बनते जा रहे हैं।

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