Breaking News

अब तक 17 US सैनिक मार गिराए! जॉर्डन ने ट्रंप को धोखा देकर की ईरान की मदद?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एक बार फिर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाही उन अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है जो हाल के दिनों में ईरान समर्थित हमलों का शिकार हुए थे। वहीं अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सेना ठिकानों को निशाना बनाया। इसके साथ ही पूरे पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अब इस संघर्ष के पड़ोसी देशों तक फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। अमेरिकी सेना के अनुसार शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को नष्ट करने की प्रक्रिया जिसे कंट्रोलोल्ड डिटोनेशन कहा जाता है। इसके दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इस घटना के बाद युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। 

इसे भी पढ़ें: Iran ने ढूंढ़ ली खाड़ी देशों की कमजोर नस, ऐसा वार, घुटनों पर आएंगे अरब देश!

अमेरिका का कहना है कि उसके सैनिकों पर लगातार हो रहे हमलों का जवाब देना जरूरी हो गया था इसलिए ईरान के सैन्य ठिकानों और उससे जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका की कार्रवाही का जवाब देने में देर नहीं की। ईरानी सेना ने अमेरिका के कई सैन्य अड्डों की ओर मिसाइलें दागी। रिपोर्ट के मुताबिक इराक, जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा जॉर्डन की दिशा में भी मिसाइलें दागे जाने की खबर सामने आई है जिससे पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया लेकिन इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत बढ़ा दी है। इसी बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह संघर्ष अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। जॉर्डन, इराक, सीरिया और इजराइल जैसे देशों की सुरक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ने लगा है। जॉर्डन की ओर मिसाइल आगे जाने के बाद यह आशंका और ज्यादा गहरा गई है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो युद्ध पूरे पश्चिमी एशिया में फैल सकता है। 

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी सैनिकों का इंतज़ार कर रहे ईरानी, Donald Trump के Ground Attack प्लान पर तेहरान का आक्रामक पलटवार

इजराइल पहले से ही हाई अलर्ट पर है और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर चुका है। अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर उसके सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर आगे भी हमले होते हैं तो जवाबी कार्रवाई और ज्यादा तेज की जाएगी। वहीं ईरान ने भी कहा कि अगर अमेरिकी हमले जारी रहे तो वह और कड़ा जवाब देगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ता दिखाई दे रहा है। जानकार मानते हैं कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही सैन्य शक्ति के दम पर एक दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसका पूरा असर क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पश्चिमी एशिया में किसी भी बड़े युद्ध का असर तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिलता रहा है। दुनिया के कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। लेकिन ईरान और अमेरिका दोनों ही नहीं मान रहे हैं।

Loading

Back
Messenger