श्रीलंका का सुप्रीम कोर्ट संविधान में प्रस्तावित 22वें संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस संशोधन का मकसद निचली और ऊपरी अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाना है। इस कदम से राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे न्यायपालिका की आज़ादी पर असर पड़ सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि बड़ी संख्या में लंबित मामलों से निपटने के लिए यह ज़रूरी है। चीफ जस्टिस पी.पी. सुरसेना द्वारा नियुक्त सुप्रीम कोर्ट की पांच-सदस्यीय बेंच के सामने सुनवाई शुरू होगी। सोमवार को की गई घोषणा के अनुसार, चीफ जस्टिस समेत यह बेंच बिल के खिलाफ दायर 25 से ज़्यादा याचिकाओं और इसके समर्थन में दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
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प्रस्तावित 22वें संशोधन का मकसद सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 65 से बढ़ाकर 67 साल और कोर्ट ऑफ़ अपील के जजों की उम्र 63 से बढ़ाकर 65 साल करना है। इसमें हाई कोर्ट, ज़िला अदालतों और मजिस्ट्रेट अदालतों के जजों की रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़ाकर 62 साल करने का प्रस्ताव है। कई विपक्षी पार्टियों ने संयुक्त रूप से मांग की थी कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 12 मौजूदा जजों की पूरी बेंच करे। हालांकि, बेंच का गठन करना चीफ जस्टिस के अधिकार क्षेत्र में आता है। 22वें संशोधन बिल को 18 अगस्त को संसद में पेश किया गया, जिससे संविधान के तहत इसकी संवैधानिकता को चुनौती देने के लिए 14 दिन की समय-सीमा शुरू हो गई। अब सुप्रीम कोर्ट को तीन हफ़्ते के अंदर बिल की संवैधानिकता पर अपना फ़ैसला संसद के स्पीकर को बताना होगा।
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विपक्ष के कई नेताओं के अनुसार, याचिकाओं में मुख्य तर्क यह है कि 22वां संशोधन संविधान के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन करता है, जो लोगों की संप्रभुता से संबंधित है। उनका तर्क है कि इसलिए संसद में दो-तिहाई बहुमत के अलावा इसे देशव्यापी जनमत संग्रह के ज़रिए मंज़ूरी की भी ज़रूरत है। विरोध करने वालों ने इस संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर “सीधा हमला” बताया है। उनका कहना है कि इससे कार्यकारी राष्ट्रपति को अदालतों के कामकाज को प्रभावित करने का ज़्यादा मौका मिलेगा। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि श्रीलंका बार एसोसिएशन, ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन के सदस्यों और कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन की आपत्तियों के बावजूद वह इस संशोधन को अपनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।