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घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान?

नेपाल सब दिन से सद्भाव वाला देश रहा है। नेपाल का तो नुकसान होगा ही होगा। पड़ोसी देशों को भी नुकसान इसका असर पड़ेगा। नेपाल के हिंदू अचानक मुस्लिम मोहल्लों में पहुंच गए और एक बहुत अजीब घटना हो गई। इस घटना के बाद पहली बार नेपाल में रहने वाले मुस्लिमों का भी बयान आया है।अभी तक अकड़ दिखा रहे नेपाल के मुस्लिमों की अचानक भाषा बदल गई है। नेपाल के मुस्लिम अचानक प्यार मोहब्बत की बातें करने लगे हैं। दरअसल आपने यह खबरें तो पढ़ी होगी कि नेपाल में मुस्लिमों ने एक कावड़ यात्रा पर हमला कर दिया था। जिसके बाद तनाव बढ़ गया। नेपाल जैसे हिंदू बहुल देश में भी अब सांप्रदायिक झगड़े शुरू हो गए हैं। लेकिन इसी तनाव के बीच नेपाल के हिंदू मुस्लिम मोहल्लों में पहुंच गए और उसके बाद जो हुआ वो होश उड़ा देने वाला था। 

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नेपाल के हिंदुओं ने मुस्लिम मोहल्लों के घरों से हरे झंडे उतारने शुरू कर दिए। हिंदुओं ने कहा कि नेपाल में रहना है तो नेपाल की इज्जत करनी होगी। नेपाल के लोग अब मुस्लिम कट्टरता के खिलाफ खड़े हो गए हैं। नेपाली हिंदुओं ने मुस्लिमों के घर पर लगे इस्लामिक झंडों को हटा दिया और उसकी जगह नेपाल का झंडा लगाने की बात कही। वायरल वीडियो में  नेपाल के लोग मुस्लिम मोहल्लों में जाकर बोल रहे हैं कि नेपाली झंडा लगाओ। नेपाल का झंडा लगाओ। नेपाल का झंडा इन लोगों का कहना है कि हम नेपाल का इस्लामीकरण नहीं होने देंगे। आपको बता दें कि यह वीडियो वायरल हैं। इसकी पुष्टि हम नहीं करते लेकिन अब नेपाल से ऐसी सैकड़ों वीडियो आ रही हैं जिसमें नेपाल के लोग अपनी हिंदू पहचान को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। इसी बीच भारत का नाम लेकर नेपाल के एक सीनियर जर्नलिस्ट अनिल गिरी ने लिखा है कि नेपाल के तरई इलाकों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों और धर्म के नाम पर जमीन पर बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए भारतीय पक्ष की चेतावनी मुझे याद आ गई।

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 भारतीय पक्ष ने चेतावनी दी थी कि तरई में जो हो रहा है वह सिर्फ एक ट्रेलर है। कुछ भारतीय अधिकारी अक्सर यह चेतावनी देते आए हैं कि एक दिन आपको पूरी पिक्चर देखने को मिलेगी। क्या अब यह सच हो रहा है? क्या नेपाल की डेमोग्राफी बदल रही है? आपको बता दें कि नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी एपीएफ ने करीब 3 साल पहले नेपाल की सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी। उस वक्त नेपाल में चीन के प्यादे केपी शर्मा ओली की सरकार थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि नेपाल के तराई मधेश इलाकों में ऐसे तत्व सक्रिय हो गए हैं जो सांप्रदायिक और जातीय झगड़ों को भड़काकर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन नेपाल की सरकार ने उस वक्त कोई एक्शन नहीं लिया। 

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