एक तरफ पाकिस्तान है जहां पुलिस चौकियों पर गोलियां बरसाई जा रही है। जहां वर्दी वालों को अगवा किया जा रहा है और जहां की सरकार अपने ही पाले हुए आतंकियों से फंसी हुई है और ठीक उसी वक्त दूसरी तरफ भारत जहां तालिबान का सबसे ताकतवर मंत्री दिल्ली के रेड कारपेट पर कदम रख चुका है। एक तरफ बारूद की बदबू है तो दूसरी तरफ दोस्ती की महक। बलूचिस्तान की जियारत में आतंकियों ने पुलिस पोस्ट को कब्रिस्तान बना दिया है। नौ पुलिस वालों को उड़ा दिया है। अफरातफरी का माहौल है और पाकिस्तान के हुक्मरान डर के साए में जी रहे हैं। लेकिन इसी वक्त दिल्ली से एक ऐसी तस्वीर आती है जो पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। जिस तालिबान को पाकिस्तान अपना प्रॉक्सी समझता था उसी तालिबान का सबसे ताकतवर मंत्री आज हिंदुस्तान की जमीन पर उतर चुका है।
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पाकिस्तान में मातम है तो भारत में कूटनीति का उत्सव है। बलूचिस्तान रात के सन्नाटे में दर्जनों भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने एक पुलिस पोस्ट को घेर लिया। यह कोई आम हमला नहीं था। यह एक सीधा युद्ध था। घंटों तक गोलियां चलती है। नतीजा नौ पुलिस अधिकारी मारे जाते हैं पाकिस्तान के। हमलावर इतने बेखौफ थे कि उन्होंने आठ जवानों को अगवा तक कर लिया। गौर करने वाली बात यह है कि यह हमला उस इलाके में हुआ जिसे पाकिस्तान सुरक्षित मानता था। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएले और अन्य उग्रवादी गुटों ने अब सीधे राज्य की सत्ता को चुनौती देना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान की और पाकिस्तान की सेना जो खुद को दुनिया की बेहतरीन सेनाओं में से एक बताती है वो अपने ही पुलिस वालों को सुरक्षा देने में नाकाम रही। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसीन नकवी कैमरे पर आए लेकिन उनके चेहरे पर हार साफ दिख रही थी। मोहसीन नकवी ने तो बिना सबूत के भारत का नाम ले लिया। लेकिन दुनिया जानती है कि जब आप घर में सांप पालते हैं, आतंकी पालते हैं तो वो एक दिन आपको ही डसता है। पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकी खेती की आज फसल काटने का वक्त आ गया है और वो घट भी रही है।
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अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमारी अपने पूरे काफिले के साथ भारत की सरजमी पर पहुंचे। यह दौरा खास इसलिए है क्योंकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह किसी बड़े मंत्री का सबसे महत्वपूर्ण भारत दौरा है। भारत ने कभी बंदूक के दम पर अफगानिस्तान में घुसपैठ नहीं की। भारत ने वहां सड़क बनाई, स्कूल बनाए, अस्पताल बनाए और संसद बनाई। अब अफगानिस्तान में अकाल पड़ा है तो भारत ने हजारों टन गेहूं भेजा। जब वहां दवाइयों की कमी हुई तो भारत ने जीवन रक्षक दवाईएं भेजी।