रोजाना हजारों लोग भारतीय रेलवे में यात्रा करते हैं। किसी न किसी जगह पर जाने के लिए ट्रेन के द्वारा ही सफर किया जाता है। आपको भी ट्रेन से यात्रा करना काफी पसंद होगा। कभी भी भारतीय रेलवे में अचानक से यात्रा या इमरजेंसी में सफर करना काफी जरुरी होता है।
अक्सर सामान्य रिजर्वेशन की सभी सीटें फुल हो जाती है, तो यात्रियो के पास सिर्फ दो ही ऑप्शन रह जाते हैं- तत्काल टिकट और करंट टिकट। लेकिन एक आम इंसान अक्सर इन दोनों के बीच बड़े अंतर को समझ नहीं पता है और कन्फ्यूज हो जाता है। आखिर कौन-सा टिकट कब और कैसे बुक करें।
आपको बताते चले कि ये दोनों टिकट पूरी तरह से अलग नियमों और अलग समय पर मिलती है। आइए आपको इस लेख के जरिए करंट और तत्काल टिकट के अंतर में बताते हैं, जिससे अगली बार सफर करते समय आपको कोई परेशानी न हो।
बुकिंग का समय और टाइमिंग में है बड़ा अंतर
तत्काल टिकट को यात्रा की तारीख से ठीर एक दिन पहले बुक किया जाता है, जिसके बाद एसी क्लास की बुकिंग सुबह 10 बजे और नॉन-एसी की सुबह 11 बजे शुरू होती है। दूसरी तरफ, कंरट टिकट ट्रेन छूटने के महज कुछ महज कुछ घंटे पहले मिलता है। असल में ट्रेन का पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता है, तब बची हुई खाली सीटों को करंट टिकट के रुप में बेचा जाता है।
टिकट की कीमत और एक्स्ट्रा चार्ज का खेल
जब आप तत्काल टिकट बुक करें तो सामान्य किराए के ऊपर 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का अतिरिक्त तत्काल शुल्क देना पड़ता है, वहीं यह टिकट काफी महंगा हो जाता है। करंट टिकट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता। कई बार तो ट्रेन छूटने के साथ चार्ट बनने के बाद करंट टिकट पर सामान्य किराया से भी 10 से 20 फीसदी की छूट मिलती है।
सीट कंफर्म होने की गारंटी और वेटिंग का नियम
तत्काल में आपको कंफर्म सीट के साथ-साथ वेटिंग टिकट भी मिल सकता है। वैसे जब चार्ट बन जाता है, तभी सीट कंफर्म होती है। हालांकि, करंट में ऐसा मामला नहीं होता है। यह टिकट आपको तभी मिलेगी जब ट्रेन में कोई बर्थ खाली बचा है। करंट टिकट हमेशा से 100% कंफर्म ही मिलता है, इसमें वेटिंग टिकट जारी करने का कोई नियम नहीं है।
कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े जरूरी नियम
इसके अलावा, आप कंफर्म या फिर तत्काल टिकट को कैंसिल करते हैं, तो रेलवे के नियमों के अनुसार आपको एक भी रुपया नहीं मिलेगा। आपका सारा पैसा डूब जाएगा। दूसरी ओर कंरट टिकट को आप ट्रेन छूटने से पहले कैंसिल करते हैं, तो रेलवे के सामान्य कैंसिलेशन नियमों के जरिए क्लैरिकल चार्ज काटकर बाकी की रकम आपके बैंक खाते में वापस रिफंड कर सकता है।