📰 बलिया के एतिहासिक ददरी मेला में रविवार को शाम भारी भीड़ के बीच अव्यवस्थाओं और मेला प्रबंधन की लापरवाही साफ दिखाई दी। जलपरी शो के टिकट काउंटर पर हुए हंगामे, झूला संचालकों की बदसलूकी, मारपीट और अफरातफरी के बीच मेला गए विजयीपुर, बलिया के रहने वाले एक अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिन्हा की मौत भी हो गई।
🛑 परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, टिकट काउंटर पर मौजूद संदिग्ध टप्पेबाज बड़े नोट बदलने के नाम पर लोगों से पैसे का लेनदेन करते थे। कथित तौर पर पैसे कम दिए जाने की आशंका से विवाद बढ़ा और झूला कर्मचारियों के साथ कहासुनी से माहौल पूरी तरह तनावग्रस्त हो गया। इसी बीच मेले में पहुंचे विजयीपुर, बलिया के रहने वाले एक अधिवक्ता प्रवीण कुमार सिन्हा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
🚑 प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उन्हें अचानक माइनर अटैक जैसा दौरा पड़ा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने CPR दिया और जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
🔍 रविवारी की घटना ने मेला आयोजकों, प्रशासन और पुलिस की खामोशी पर की सवाल खड़े किए। ददरी मेला प्रतिदिन हजारों लोगों की भीड़ जुटाता है, लेकिन—
⚠️ एम्बुलेंस जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं नहीं, झूला कर्मचारियों की लापरवाही की शिकायतें संदिग्ध टप्पेबाजों की मौजूदगी पर कारर्वाई नहीं, सुरक्षा और मॉनिटरिंग में पुलिस की भारी लापरवाही सबसे बड़ा सवाल यह है कि शाम 6:00–6:30 बजे की CCTV फुटेज अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? आखिर किस वजह से प्रशासन और मेला प्रबंधन इस घटना पर चुप्पी साधे हैं? ददरी जैसा एतिहासिक और भीड़भाड़ वाला मेला जहां दूर-दराज से परिवार आते हैं, वहां सुरक्षा का यह स्तर मेला प्रबारी, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की जवाबदेही को कटघरे में खड़ा करता है।
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