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Chris Broad का सनसनीखेज दावा: ICC में भारत को मिली ‘राजनीतिक छूट’, नियमों से खिलवाड़

पूर्व इंग्लैंड क्रिकेटर और आईसीसी मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने हाल ही में भारतीय टीम और प्रबंधन को लेकर एक चौकाने वाला खुलासा किया है। बता दें कि क्रिस ब्रॉड ने एक इंटरव्यू में बताया किया कि उनके मैच अधिकारी रहने के दौरान उन्हें एक बार फोन कॉल आया था जिसमें कहा गया कि वे “भारत के लिए दंड में ढील दें” और धीमी ओवर-रेट के लिए जुर्माना न लगाएं। बता दें कि यह घटना तब हुई जब भारतीय टीम निर्धारित ओवर-रेट से तीन या चार ओवर पीछे थी।
ब्रॉड ने बताया कि उस समय भारत को कुछ विशेष परिस्थितियों में अलग व्यवहार मिलता था, और यह क्रिकेट की राजनीति का उदाहरण था। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह किस मैच में हुआ था या भारत किसके खिलाफ खेल रहा था, लेकिन उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें फोन करके कहा गया, “थोड़ी ढील दें, समय निकालें क्योंकि यह भारत है।” उन्होंने कहा कि उन्होंने नियमों के अनुरूप ओवर-रेट को थ्रेशोल्ड के नीचे लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
पूर्व इंग्लैंड ओपनर ने आगे कहा कि अगली ही खेल में भारत ने वही गलती दोहराई। उस समय भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उनके चेतावनी के बावजूद समय पर ओवर-रेट पूरा नहीं किया, जिससे उन्हें नियम लागू करना पड़ा। ब्रॉड ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि मैदान पर निर्णयों में कभी-कभी राजनीतिक दबाव भी काम करता है।
क्रिस ब्रॉड ने यह भी कहा कि अपने करियर में उन्होंने कुल 123 टेस्ट मैचों में रेफरी की भूमिका निभाई, जिनमें आखिरी फरवरी 2024 में कोलंबो में हुआ। उनका मानना है कि मैच अधिकारियों का काम अब पहले जैसी सीधी और निष्पक्ष स्थिति में नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक प्रभाव काफी बढ़ गए हैं। ब्रॉड के अनुसार, भारत की बढ़ती वित्तीय और प्रशासनिक ताकत ने आईसीसी में राजनीति को और अधिक मुश्किल बना दिया है।
ब्रॉड ने कहा, “हमारे समय में विंस वैन डर बाइल (ICC अंपायर मैनेजर) का समर्थन मिला करता था क्योंकि वे क्रिकेट बैकग्राउंड से थे, लेकिन उनके जाने के बाद प्रबंधन काफी कमजोर हो गया। अब भारत के पास अधिक संसाधन और प्रभाव है और आईसीसी में उनका दबदबा बढ़ गया है। मैं खुश हूं कि मैं अब वहां नहीं हूं, क्योंकि अब यह स्थिति बहुत अधिक राजनीतिक हो गई है।”
मौजूदा जानकारी के अनुसार, क्रिकेट में नियमों के पालन और राजनीतिक प्रभाव के बीच संतुलन बनाना अब मैच अधिकारियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम बन गया है और यह स्थिति आने वाले समय में और अधिक बड़ी हो सकती है।

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