उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं, जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।
सिंह ने कहा, ‘‘मैंने अदालत के समक्ष दलील दी कि चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। आरोपियों के खिलाफ आजीवन कारावास वाली धाराएं भी लगाई गई हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वहीं, उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि आजीवन कारावास वाली धारा तभी लगाई जा सकती है, जब आरोपी आदतन अपराधी हो या उसे पहले किसी अपराध में सजा मिल चुकी हो।
इस मामले में आरोपी पहली बार अपराध के आरोपी हैं, इसलिए आजीवन कारावास वाली धारा लागू नहीं होती।’’
सिंह ने यह भी दलील दी कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर पुलिस ने सही धाराएं लगाई होतीं तो मेरे मुवक्किलों को स्थानीय अदालत से जमानत मिल सकती थी।’’
सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।
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