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Bombay High Court ने रद्द की Ramesh Mhatre की Bail, 18 मामलों का हवाला देते हुए 19 जुलाई तक Surrender का आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की ज़मानत रद्द कर दी। उन्हें इस महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र के ठाणे में एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। यह फ़ैसला तब आया है, जब कुछ दिन पहले ही एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में म्हात्रे को ज़मानत दी थी। इस मामले का खुद संज्ञान लेते हुए, हाई कोर्ट ने म्हात्रे को 19 जुलाई को शाम 5 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया और कहा कि मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की डिवीजन बेंच ने दिया। बेंच ने डॉक्टरों से “मानवता की सेवा” को ध्यान में रखते हुए 22 जुलाई को होने वाले अपने विरोध प्रदर्शन को वापस लेने का भी आग्रह किया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने कहा, “भले ही उन्हें 17 मामलों में बरी कर दिया गया हो, लेकिन कोर्ट को इस बात पर विचार करना चाहिए था कि उनका नाम 18 मामलों में आया था, जिनमें से कुछ बहुत गंभीर और जघन्य प्रकृति के थे।

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म्हात्रे के खिलाफ लोगों का गुस्सा

इस महीने की शुरुआत में म्हात्रे और उनके तीन साथियों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे सिविक हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों और एक मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट करते दिखे थे। इस घटना की लोगों ने कड़ी निंदा की और गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने स्टाफ के साथ तब मारपीट की जब एक परिवार को नवजात शिशु को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दी गई थी। इस घटना के बाद, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इलाके में क्लीनिक और अस्पताल बंद करने की धमकी दी, जिसके बाद म्हात्रे और पांच अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। बाद में, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और इस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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हालांकि, ठाणे ज़िले की कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) के कॉर्पोरेटर म्हात्रे को 14 जुलाई को स्थानीय अदालत से ज़मानत मिल गई। बाद में यह मामला हाई कोर्ट पहुँच गया और डॉक्टरों ने अगले हफ़्ते विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी।
IMA ने पुलिस पर म्हात्रे को “VIP ट्रीटमेंट” देने का आरोप भी लगाया है और दावा किया है कि अधिकारियों ने “काम में बाधा डालने” के लिए उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करने की धमकी दी थी। एसोसिएशन ने अब चार मांगें रखी हैं, जिनमें माफ़ी मांगना और उस सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड करना शामिल है, जिसने कथित तौर पर वकीलों को धमकी दी थी।

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