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नाम बदलने से ज्यादा ज़रूरी है सोच बदलना, स्टालिन का राजभवन के ‘लोकभवन’ बनने पर तीखा प्रहार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रविवार को राज्य के राजभवन राज्यपाल के आधिकारिक आवास का नाम बदलकर लोकभवन करने के प्रस्ताव की तीखी आलोचना की। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार राज्यपाल आरएन रवि ने इस कदम की सिफ़ारिश की थी। स्टालिन ने कहा कि यह मुद्दा नामों का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान का है। उन्होंने इस कदम को अनावश्यक बताया। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि असली जवाबदेही जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के अधिकार का सम्मान करने में निहित है।

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उन्होंने एक्स पर तमिल में लिखे एक पोस्ट में सवाल किया नाम बदलने से ज़्यादा ज़रूरी है मानसिकता बदलना! विधान सभा = जनता की सभा! जो लोग विधान सभा का सम्मान नहीं करते, उनके लिए क्या नाम बदलकर लोक भवन रखना सिर्फ़ एक दिखावटी इशारा है? क्या यह लोकतंत्र के सिद्धांतों की आँखों में धूल झोंकने जैसा है? जनता द्वारा चुनी गई सरकारों और जनता की इच्छा पूरी करने वाली संप्रभु विधान सभा का सम्मान करना समय की मांग है। डीएमके प्रमुख ने आगे कहा कि अगर सोच और व्यवहार में बदलाव नहीं आया तो यह भी अनावश्यक है।

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उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग विधानमंडल की भूमिका का सम्मान नहीं करते, वे राज्यपाल के आवास का नाम बदलकर अपनी क्षतिपूर्ति नहीं कर सकते। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने शनिवार को केंद्र के निर्देश को लागू करते हुए कोलकाता स्थित राजभवन, फ्लैगस्टाफ हाउस और दार्जिलिंग निवास का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया।

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