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Defence Minister राजनाथ सिंह की Ex-Servicemen से अपील- Agniveer और युवाओं का मार्गदर्शन करें’

दसवें रक्षा बल वयोवृद्ध दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को देशभर में पूर्व सैनिकों की रैलियां, पुष्पांजलि समारोह, शिकायत निवारण काउंटर और सहायता केंद्र आयोजित किए गए। मुख्य समारोह दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया गया, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से लगभग 2,500 पूर्व सैनिक इसमें शामिल हुए। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, सामूहिक साहस के प्रतीक और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से अपने अनुभवों के माध्यम से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा प्रदान करने, आपातकालीन स्थितियों में नागरिक प्रशासन का साथ देने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का आग्रह किया, जिससे भविष्य के लिए एक मजबूत भारत की नींव रखी जा सके।

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राजनाथ सिंह ने उपस्थित पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव, नेतृत्व और मूल्य देश के लिए अमूल्य धरोहर हैंहमारे समाज, विशेषकर युवाओं को आपसे सीखने की आवश्यकता हैचाहे वह शिक्षा हो, कौशल विकास हो, आपदा प्रबंधन हो, सामुदायिक नेतृत्व हो या नवाचार का मार्ग हो, आपकी भागीदारी आने वाली पीढ़ियों पर सकारात्मक और अमिट प्रभाव छोड़ सकती है। रक्षा मंत्री ने लगभग 40 वर्ष पूर्व श्रीलंका में शांति स्थापना के उद्देश्य से भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) द्वारा चलाए गए ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले वीर पूर्व सैनिकों को याद किया।

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उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया। कई सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनके शौर्य, बलिदान और संघर्ष को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार न केवल ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को खुले तौर पर स्वीकार कर रही है, बल्कि हर स्तर पर उनके योगदान को मान्यता देने की प्रक्रिया में भी है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में श्रीलंका का दौरा किया था, तब उन्होंने आईपीकेएफ स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब हम नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में भी आईपीकेएफ सैनिकों के योगदान को मान्यता दे रहे हैं और उन्हें वह सम्मान प्रदान कर रहे हैं जिसके वे हकदार हैं।

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