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Kartavyapath| मुंबई की सूरत बदल रहा ये पुल, जानें अटल सेतु के बारे में

आजादी के बाद महाराष्ट्र में विकास बयार बही है। महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास की बदौलत भारत का औद्योगिक विकास भी होता रहा है। केंद्र सरकार महाराष्ट्र में इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व रूप से निवेश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते छह महीनों में 5वीं बार महाराष्ट्र के दौरे पर थे, जहां उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी न्हावा शेवा अटल सेतु का शुभारंभ किया है। इस दौरान उन्होंने फोटो गैलरी और अटल सेतु पर प्रदर्शित मॉडल का अवलोकन भी किया है।

जानकारी के लिए बता दें कि दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अटल सेतु का शिलान्यास किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि जब जीवन की गुणवत्ता सुधरती है तो उस शहर का विकास भी तेज गति से होने लगता है। बता दें कि मुंबई का अटल सेतु, इसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के नाम से भी जाना जाता है। अटल सेतु का उद्घाटन होने के बाद पहले महीने में ही आठ लाख से ज्यादा वाहनों को पार कर लिया है। इस पुल का उद्घाटन इस साल 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया गया था। जिसके बाद 13 जनवरी से पुल आम जनता के लिए चालू हो गया था। अटल सेतु 21.8 किलोमीटर लंबा है और दक्षिण मुंबई और नवी मुंबई के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाता है। एमएमआरडीए के अधिकारी का कहना है कि पुल से अब तक आठ लाख वाहन गुजर चुके है।  

ये है अटल सेतु की खासियत

– अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल है। ये सबसे लंबा समुद्री पुल भी है।

– अटल सेतु के निर्माण से पहले तक मुंबई से नवी मुंबई जाने में दो घंटे का समय लगता था, जो अब महज 15 मिनट में सिमट गया है।

– रोजाना 70 हजार से अधिक गाड़ियों का आवागमन इस अटल सेतु पर होने की संभावना है। इस सेतु पर 100 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकती है।

– नवी मुंबई के लिए ये सेतु लाइफलाइन के तौर पर काम करेगा।

– नए पुल का निर्माण होने के बाद मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और नवी मंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा को कनेक्टिविटी भी तेज मिलेगी।

– मुंबई से पुणे, गोवा, दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।

– नए पुल के बनने के बाद मुंबई बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है।

– बता दें कि अटल सेतु बनाने में 17,840 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।

– मॉडर्न इंजीनियरिंग टेकनीक, पर्यावरण के अनुकूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए इस अटल सेतु को बनाया गया है।

खास सामग्री से निर्मित
अटल सेतु की अन्य खासियतों की बात करें तो ये ऐसा पुल है जो भूकंप रोधी होने के साथ ही साइक्लोन रोधी भी है। इस पुल पर भूकंप और साइक्लोन का कोई असर नहीं होगा। ये विश्व का 12वां समुद्र तल पर बना सबसे लंबा पुल है। इस पुल की खासियत है कि इसका निर्माण उस सामग्री से हुआ है जो परमाणु रिएक्टर बनाती है। इसे इस समाग्री से इसलिए बनाया गया है ताकि किसी तरह की लीकेज की समस्या ना हो सके। बता दें कि जिस समाग्री से ये पुल बना है, वो एपॉक्सी स्ट्रेंस कहलाता है, जिससे पुल को शानदार मजबूती मिलती है।

इस पुल की खासियत है कि ये भूकंप, हाई टाइड, साइक्लोन का भी मजबूती से खड़ा रहकर सामना कर सकता है। किसी प्राकृतिक आपदा के आगे पुल नहीं टूटेगा। इस पुलिस का निर्माण करने में एफिल टॉवर की तुलना में 17 गुणा, हावड़ा पुल से चार गुणा अधिक स्टील लगा है जो कि 1.77 लाख मीट्रिक टन है। वहीं पुल निर्माण में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से छह गुणा अधिक कंक्रीट लगा है। इसमें 5.05 लाख मीट्रिक टन सीमेंट उपयोग में लाया गया है। इस पुल पर सुरक्षा के लिहाज से 190 सीसीटीवी कैमरे लगाए गे हैं जो कि एआई युक्त है।

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