जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस क्षेत्र को केवल सुंदर सिनेमाई नजारों तक सीमित रहने के बजाय एक ऐसे जीवंत रचनात्मक केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां अपनी कहानियां सोची जाएं और उनका निर्माण किया जाए। यहां डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पहले अंतरराष्ट्रीय जम्मू-कश्मीर फिल्म समारोह (आईएफएफजीके) के समापन समारोह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र के पास फिल्म जगत को देने के लिए इसके सुंदर परिदृश्यों से कहीं अधिक बहुत कुछ है। सूचना एवं प्रसारण केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
जंगली , आरज़ू , कश्मीर की कली और कभी-कभी जैसी सदाबहार फिल्मों के डल झील पर खुले आसमान के नीचे विशेष प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, दशकों तक, कश्मीर सिनेमा के पर्दे के जरिए दर्शकों तक पहुंचा। इस हफ्ते, एक तरह से, वह पर्दा वापस कश्मीर आ गया। मुझे उम्मीद है कि सिनेमा जम्मू-कश्मीर के इस पहले फिल्म समारोह की सबसे यादगार यादों में से एक रहेगा।
उन्होंने कहा, हमारी महत्वाकांक्षा केवल एक सुंदर शूटिंग स्थल बने रहने से आगे होनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर को लगातार एक ऐसी जगह बनना होगा, जहां से कहानियां निकलें, प्रतिभाओं की खोज हो, और फिल्मों की परिकल्पना एवं निर्माण किया जाए। चार दिवसीय इस फिल्म महोत्सव में 30 से अधिक देशों की 120 फिल्मों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें प्रौद्योगिकी, शिल्प और कहानी बयां करने जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र, परिचर्चाएं और सहयोगात्मक सत्र आयोजित किए गए।
इस दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर के युवा केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का लाभ उठाकर यहां बॉलीवुड जैसी फिल्म इंडस्ट्री स्थापित करेंगे। फारूक अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा, मुझे लगता है कि यह बहुत ही शानदार काम हुआ है। मुझे उम्मीद है कि हमारे लड़के और लड़कियां इसका पूरा लाभ उठाएंगे।
यहीं से हमारे अपने कलाकार, लेखक, संगीत निर्देशक और फिल्म निर्देशक निकलेंगे। हमारे युवा हर क्षेत्र में आगे आएंगे। पहले अंतरराष्ट्रीय जम्मू-कश्मीर फिल्म समारोह का समापन एक धमाकेदार कार्यक्रम के साथ हुआ।
मशहूर पॉप और पार्श्व गायिका ऊषा उत्थुप के मंच संभालते ही चार दिवसीय यह फिल्म महोत्सव अपने यादगार मुकाम पर पहुंच गया। दिग्गज गायिका ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से समापन समारोह में समां बांध दिया। हिंदी फिल्मों के मशहूर गानों, वेस्टर्न जैज और पॉप धुनों के बेहतरीन तालमेल से उत्थुप ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया।
उनकी प्रस्तुति पर युवा, बुजुर्ग, फिल्म निर्माता, विदेशी प्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति अपनी जगहों से उठकर झूमने लगे। अपनी विशिष्ट और भारी आवाज में उन्होंने हरि ओम हरि और डार्लिंग जैसे अपने बेहद लोकप्रिय और ऊर्जावान गानों की शानदार प्रस्तुति दी। उत्थुप की इस जबरदस्त प्रस्तुति ने फिल्म महोत्सव को एक शानदार और यादगार समापन दिया।
एक घंटे से भी अधिक समय तक उत्थुप एक के बाद एक गाने गाती रहीं और वहां मौजूद दर्शक, जिनमें ज्यादातर युवा थे, लगातार झूमते रहे। जब उत्थुप ने अपनी गायकी से मंच पर जलवा बिखेरा, तो जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला भी झूठ उठे।
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