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राहुल गांधी का Maharashtra सरकार पर हमला: TET Paper Leak से 6 लाख छात्र अधर में

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने पेपर लीक होने के आरोप के बाद टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) 2026 रद्द किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने के दो हफ़्ते बाद भी कोई नई तारीख घोषित नहीं की गई है, जिससे लगभग छह लाख उम्मीदवार अधर में लटके हुए हैं। ‘X’ पर एक पोस्ट में विपक्ष के नेता ने लिखा कि महाराष्ट्र TET का पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द कर दी गई। 6 लाख उम्मीदवार अधर में लटके हैं। दो हफ़्ते बीत चुके हैं, नई तारीख का कोई अता-पता नहीं है।
 

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उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले आज़ाद घूम रहे हैं, सिस्टम पर कोई दाग नहीं लगा है, और सज़ा उसे भुगतनी पड़ रही है जिसने ईमानदारी से मेहनत की थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र और उम्मीदवार इस गड़बड़ी की वजह से परेशान हो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि ये देश के मौजूदा और भविष्य के शिक्षक हैं, जिनके हाथों में भारत का भविष्य है। ये वही लोग हैं जिन्होंने साल-दर-साल तैयारी की, फ़ॉर्म भरे, फ़ीस दी और दूर-दराज़ के सेंटर्स तक का सफ़र किया। और अब वे बस इंतज़ार कर रहे हैं – बिना किसी तारीख़ के, बिना किसी जवाब के।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करते हुए, राहुल गांधी ने तीन सूत्रीय मांग रखी, जिसमें उनकी अपील का मुख्य बिंदु महाराष्ट्र TET का नया शेड्यूल तुरंत घोषित करना था। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि बिना और देरी किए परीक्षा की नई तारीख घोषित की जाए, उम्मीदवारों को सज़ा देने के बजाय पेपर लीक के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए, और उन उम्मीदवारों को उम्र सीमा में छूट दी जाए जिनकी पात्रता परीक्षा टलने से प्रभावित हुई हो सकती है।
 

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उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री जी, आज ही तीन बातें: समय-सीमा: TET की नई तारीख अभी घोषित करें; जवाबदेही: लीक के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो, उम्मीदवारों पर नहीं; भविष्य की सुरक्षा: जिनका साल इस लीक की वजह से बर्बाद हुआ, उन्हें उम्र सीमा में छूट मिलनी चाहिए। राहुल ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद अनिश्चितता में जी रहे लाखों उम्मीदवारों का भरोसा बहाल करने के लिए सरकार को तेज़ी से कदम उठाने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासनिक विफलता का बोझ उन लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए जिन्होंने सालों तक ईमानदारी से तैयारी की थी।
 
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