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गन्ना मिल पर शुल्क लगाने पर पुनर्विचार करें महाराष्ट्र सरकार: शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह बारिश से प्रभावित किसानों की मदद करने के बजाय ‘‘गन्ना किसानों’’ से मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) में योगदान करवा रही है।

उन्होंने सरकार से गन्ना मिल पर शुल्क लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।
यह आलोचना सरकार द्वारा सीएमआरएफ के माध्यम से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए मिल में गन्ने पर ‘लेवी’ (शुल्क) लगाने के कदम से उत्पन्न हुई है।

पवार ने कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य है कि महाराष्ट्र सरकार ने बाढ़ से प्रभावित मराठवाड़ा के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए गन्ना किसानों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने का फैसला किया है। मैं सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूं।’’

सरकार ने पिछले सप्ताह सीएमआरएफ के लिए मिल पर प्रति टन गन्ने पर 10 रुपये तथा बाढ़ प्रभावित किसानों की सहायता के लिए प्रति टन 5 रुपये का शुल्क लगाने का निर्णय लिया था।
राजू शेट्टी, कांग्रेस विधान परिषद सदस्य सतेज पाटिल और राकांपा (शरद चंद्र पवार) विधायक रोहित पवार सहित कई किसान नेताओं ने इस शुल्क का विरोध किया है और इसे अनुचित और वित्तीय बोझ बताया है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि मराठवाड़ा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है, जो बारिश और बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को स्पष्ट किया कि यह योगदान गन्ना मिलों के मुनाफे से आएगा, न कि किसानों की कमाई से।
फडणवीस ने अहिल्यानगर में एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘महाराष्ट्र में लगभग 200 मिल हैं। एक मिल को सीएमआरएफ में लगभग 25 लाख रुपये का योगदान देना पड़ सकता है। हम किसानों से नहीं, बल्कि चीनी मिलों के मुनाफे से धन की मांग कर रहे हैं।’’

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे।
उन्होंने इस फैसले की आलोचना करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वे इसे गलत तरह से पेश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कुछ लोग इतना गिर गए हैं कि वे इसे सरकार द्वारा किसानों से पैसा लेने के रूप में चित्रित कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि यह योगदान मिल के मुनाफे से है और यह मराठवाड़ा के बाढ़ प्रभावित किसानों को जाएगा। कुछ मिल तो टन भार में किसानों के साथ धोखाधड़ी भी करती पाई गई हैं।

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