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आज लखनऊ स्थित विधान भवन में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह के गरिमामयी अवसर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सम्मिलित हुए वहॉ माननीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी एवं हरिवंश, राज्यसभा के उपसभापति जी का पुष्पगुच्छ भेंट कर अंगवस्त्र पहनाकर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
स्वागत समारोह के उपरांत, उप मुख्यमंत्री जी ने महानुभावों के साथ विभिन्न संगठनात्मक विषयों एवं संसदीय परंपराओं पर गहन मंथन व विचार-विमर्श किया। सम्मेलन के दौरान विधायी कार्यों की शुचिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा हुई। मौर्य जी ने बताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत में योगदान का संकल्प, राज्य विधानसभाओं में कम से कम 30 दिन की बैठक का संकल्प, विधाई कार्य और बेहतर करने के लिए प्रौद्योगिकी और AI का उपयोग, सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करने का संकल्प, डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ तथ्यपरक और ज्ञानपूर्ण चर्चा हेतु जनप्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण का संकल्प, विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों पर तुलनात्मक आंकलन विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों पर तुलनात्मक आंकलन जैसे छह संकल्प लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ओम बिरला जी का जमीनी राजनीति और सांगठनिक ढांचे का अनुभव बहुत व्यापक है। उनसे मिलने वाली सलाह कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जमीनी स्तर पर अनुशासन बनाए रखने में सहायक होती है। एक अध्यक्ष के रूप में वे विधायी प्रक्रियाओं और सरकारी जवाबदेही को करीब से देखते हैं, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के उनके सुझाव शासन को अधिक प्रभावी बनाते हैं। संसद के माध्यम से वे सीधे जनता की समस्याओं और उनके समाधान की चर्चाओं का केंद्र रहे हैं।
साथ ही मौर्य जी ने राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश जी का भी स्वागत कर उनका अभिवादन किया। उन्होने कहा कि उपसभापति जी एक कुशल संपादक और सामान्य व्यक्ति के रूप में उन्हें लोगों से जुडना और एक साझा लक्ष्य की ओर ले जाने का लंबा अनुभव है। राजनीति के शिखर पर पहुँचने से पूर्व उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया। एक कुशल संपादक के रूप में उन्होंने समाज की समस्याओं को मुखरता से उठाने और जन-जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका संपादन कार्य उनकी वैचारिक स्पष्टता को दर्शाता है। विधायी प्रक्रियाओं की उनकी गहरी समझ सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और कुशलता लाने के लिए एक बेहतर रूपरेखा प्रदान करती है। वे हमेशा अंतिम व्यक्ति के उत्थान की बात करते हैं जिससे जनमानस के लिए लाभकारी नीतियां बनाने में मदद मिलती है। अनुभव एक ऐसा दर्पण है, जिसमें हम न केवल अपना वर्तमान देख सकते हैं, बल्कि भविष्य की राह भी सुधार सकते हैं।
इस अवसर पर ओम बिरला जी लोकसभा अध्यक्ष, हरिवंश जी, राज्यसभा उपसभापति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, सतीश महाना जी, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, कुंवर मानवेन्द्र सिंह जी, विधान परिषद सभापति एवं वरिष्ठ गणमान्य सम्मिलित हुए।
