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Prabhasakshi NewsRoom: अमेरिकी समर्थन के बावजूद चीन से दोस्ती नहीं तोड़ेगा पाक, रावलपिंडी हेडक्वार्टर में धूमधाम से मना चीनी सेना की 98वीं वर्षगाँठ का समारोह

पाकिस्तान की सेना ने शुक्रवार को रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की 98वीं वर्षगांठ पर भव्य समारोह आयोजित किया। इस आयोजन के माध्यम से इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच गहराती रक्षा साझेदारी को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया। यह समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान से होने वाले आयात पर 19% का अप्रत्याशित टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह फैसला वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच नए व्यापार समझौतों के तुरंत बाद आया।
हम आपको बता दें कि GHQ में आयोजित समारोह में पाकिस्तान की सेना ने अपने रणनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया। कार्यक्रम में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर ने चीनी राजदूत जियांग ज़ैदोंग और PLA के रक्षा अटैची मेजर जनरल वांग झोंग की मेजबानी की। इस समारोह में सैन्य सम्मान, संयुक्त रक्षा उपकरणों की प्रदर्शनी और स्पष्ट राजनीतिक संदेश शामिल थे। मुनीर ने पाकिस्तान-चीन संबंधों को “आपसी विश्वास और साझा नियति का प्रतीक” बताते हुए PLA और पाकिस्तानी सेना को “आयरन ब्रदर्स” कहा।

मुनीर का संदेश स्पष्ट था कि पाकिस्तान, अमेरिका के साथ लेन-देन आधारित संबंधों और घरेलू आर्थिक संकटों के बीच भी, चीन के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को नहीं छोड़ेगा। देखा जाये तो IMF की कड़ी शर्तों और पश्चिमी फंडिंग के अनिश्चित स्रोतों के बीच, इस्लामाबाद खुद को बीजिंग के साथ खड़ा पाने में ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। PLA के साथ “आयरन ब्रदर्स” का संबोधन कर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने साफ कर दिया कि बीजिंग-इस्लामाबाद का रक्षा व आर्थिक गठजोड़ पाकिस्तान की सुरक्षा व विकास नीति की रीढ़ है।
दूसरी ओर, चीन के लिए यह समारोह कूटनीतिक जीत साबित हुआ। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, दक्षिण एशिया में एक परमाणु संपन्न सहयोगी पर गहरी पकड़ बनाना बीजिंग की क्षेत्रीय उपस्थिति को मजबूत करता है। GHQ में आयोजित समारोह चीन की पाकिस्तान में प्राथमिक रक्षा और विकास साझेदार के रूप में भूमिका का स्पष्ट राजनीतिक समर्थन था। यह साफ देखने में आ रहा है कि अमेरिकी समर्थन के बावजूद, रावलपिंडी अप्रभावित है। बदलते वैश्विक गठबंधनों के दौर में पाकिस्तान ने पश्चिमी साझेदारों के अनिश्चितता वाले रुख की बजाय बीजिंग के साथ स्थिरता पर दांव लगाया है। यह एक ऐसा दांव है जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
बहरहाल, चीन को दक्षिण एशिया में एक स्थायी और गहरे सहयोगी के रूप में पाकिस्तान की उपस्थिति अमेरिका के खिलाफ वैश्विक शक्ति संतुलन में फायदा देती है। GHQ समारोह ने यह संदेश दिया है कि चीन का प्रभाव पाकिस्तान की रक्षा और विकास नीतियों में स्थायी है। देखा जाये तो भारत के लिए यह चिंता का विषय है। चीन और पाकिस्तान का गहराता गठबंधन क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को और जटिल बना सकता है।

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