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चीन के साथ सीमा पर शांति, अब समाधान की बारी, बीजिंग में डोभाल, LAC पर बनेगी फाइनल बात?

देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आज चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच रहे हैं। डोभाल पिछले कई वर्षों से चीन के साथ सीमा विवाद में भारतीय पक्ष के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त हैं। बीजिंग दौरे पर डोवाल की मुलाकात चीनी विदेश मंत्री से होनी है। लेकिन दोनों के बीच यह द्विपक्षीय बैठक क्यों अहम हो जाती है? क्या दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में डोभाल का यह दौरा जो है निर्णायक साबित होगा? देश के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एलएसी पर चीन के साथ मुख्य वार्ताकार हैं। इस पर चीन की सहमति भारत के लिए पहली कूटनीतिक जीत है। क्योंकि दुनिया जानती है अजीत डोभाल जिस मसले की जिम्मेदारी उठाते हैं वो मसला हल हो ही जाता है। अजीत डोभाल जब बीजिंग पहुंचेंगे तब चीन के अपने काउंटर पार्ट विदेश मंत्री वांग यी के साथ वार्ता एलएसी पर निर्णायक मोड़ ले सकती है। 

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डोभाल के लिए पहली बार नहीं बल्कि वांग यी के साथ एलएसी समिट के दौरान भी वह मिल चुके हैं और यह उम्मीद जता चुके हैं कि भारत के साथ चीन एलएसी पर पुराने विवाद को लेकर सकारात्मक है। वांग यी के साथ अजीत डोभाल पहले भी मिल चुके हैं और दोनों के बीच आपसी तालमेल बेहतर माना जाता है। अबकी बार अजीत डोभाल के बीजिंग दौरे पर भी इसलिए उम्मीद जताई जा रही है। अजीत डोभाल चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की वार्ता में शामिल हैं। वांग और डोभाल भारत और चीन की तरफ से नियुक्त विशेष प्रतिनिधि हैं। वार्ता का मकसद 3448 किमी लंबी एलएसी पर तनाव घटाना है। इसके साथ सीमा से जुड़े मुद्दों का स्थाई समाधान तलाशने पर भी बात होगी। विशेष प्रतिनिधि स्तर पर बातचीत की व्यवस्था 2003 में की गई थी ताकि एक टाइम फ्रेम में सीमा विवाद दोनों पक्षों की सहमति से सुलझाया जा सके। 

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अजीत डोभाल और वांग यी के बीच बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ सकते हैं। शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है।

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