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Canada में Khalistani Terrorist Arsh Dalla और Hindu Temple पर हमले का आरोपी Inderjeet Gosal गिरफ्तार

कनाडा में दो बड़ी गिरफ्तारियों की खबर है। एक गिरफ्तारी खालिस्तानी आतंकी की हुई है और दूसरी गिरफ्तारी हिंदू मंदिर पर हुए हमला मामले में की गयी है। मीडिया खबरों के मुताबिक भारत द्वारा आतंकवादी घोषित खालिस्तानी चरमपंथी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला को गोलीबारी की एक घटना के संबंध में कनाडा के ओंटारियो प्रांत में संभवत: गिरफ्तार कर लिया गया है। हम आपको बता दें कि गोलीबारी की यह घटना 28 अक्टूबर को मिल्टन में हुई थी। हैल्टन क्षेत्रीय पुलिस सेवा (एचआरपीएस) ने एक बयान में 29 अक्टूबर को कहा था कि उसने एक जांच के बाद, दो लोगों को गोलीबारी के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों लोग एक अस्पताल गए थे और उनमें से एक गोली से जख्मी था, जिसे बाद में छुट्टी दे दी गई। एचआरपीएस ने उनकी पहचान का खुलासा नहीं किया और कहा कि दोनों आरोपियों को ‘‘जमानत संबंधी सुनवाई तक हिरासत में रखा गया है।’’ सूत्रों ने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक के बारे में माना जा रहा है कि वह अर्श डल्ला है। डल्ला प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) से जुड़ा हुआ है और पिछले साल जून में मारे गए आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की ओर से आतंकी मॉड्यूल चलाता था।
हाल में विदेश मंत्रालय ने अर्श डल्ला का नाम उन खालिस्तानी आतंकवादियों में शामिल किया था जिनके प्रत्यर्पण के लिए कनाडा से अनुरोध किया गया है। हैल्टन पुलिस ने कहा कि वह मिल्टन में ‘‘गोलीबारी की घटना’’ की सक्रियता से जांच कर रही है। बयान में कहा गया, ‘‘28 अक्टूबर 2024 की सुबह गुएल्फ पुलिस ने एचआरपीएस से संपर्क किया, जब दो व्यक्ति वहां एक अस्पताल में आए थे। उनमें से एक का इलाज किया गया और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूसरे व्यक्ति को कोई चोट नहीं आई थी।’’ हैल्टन पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘‘एचआरपीएस मेजर क्राइम ब्यूरो अब जांच कर रहा है और दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हैल्टन हिल्स के 25 वर्षीय व्यक्ति और सरे बीसी के 28 वर्षीय व्यक्ति, दोनों पर जानबूझकर आग्नेयास्त्र चलाने का आरोप है।’’ 
इससे पहले, रविवार को पंजाब पुलिस ने बताया कि मोहाली के खरड़ से डल्ला गिरोह के दो सदस्यों को एक सिख कार्यकर्ता की हत्या में कथित रूप से संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने बताया कि यह गिरफ्तारी राज्य विशेष अभियान प्रकोष्ठ, गैंगस्टर रोधी कार्य बल और फरीदकोट पुलिस के संयुक्त अभियान के तहत की गयी। दोनों की पहचान बरनाला के भदौड़ निवासी अनमोलप्रीत सिंह उर्फ विशाल और खरड़ के निज्जर रोड निवासी नवजोत सिंह उर्फ नीटू के रूप में हुई। राज्य पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि अर्श डल्ला ने नवजोत को गुरप्रीत सिंह हरि नौ को निशाना बनाने का काम सौंपा था, जो ‘‘हरि नौ टॉक्स’’ के नाम से यूट्यूब चैनल चलाता है। पंजाब में लक्षित हत्याओं, आतंकवाद के वित्तपोषण और जबरन वसूली में शामिल होने के आरोपी अर्श डल्ला को पिछले साल जनवरी में भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया था। वह राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के तहत विभिन्न मामलों में आरोपी है। खालिस्तानी अलगाववादियों को कनाडा के कथित समर्थन तथा निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के उसके आरोप के कारण भारत-कनाडा संबंध गंभीर रूप से तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत ने इस आरोप को खारिज कर दिया है तथा कनाडा पर आरोप लगाया है कि वह खालिस्तानी समर्थकों की गतिविधियों को रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर रहा है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करना चाहते हैं।
 

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इसके अलावा, कनाडा के ब्रैम्पटन स्थित एक हिंदू मंदिर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान हमला करने के मामले में कनाडा पुलिस ने 35 वर्षीय एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। हम आपको याद दिला दें कि तीन नवंबर को ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर में एक विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट वीडियो में प्रदर्शनकारियों को खालिस्तान के समर्थन में बैनर पकड़े हुए देखा गया था। वीडियो में हाथापाई और लोगों को मंदिर के आस-पास एक-दूसरे पर डंडे से वार करते हुए भी देखा जा सकता है। एक बयान में कहा गया कि पील की क्षेत्रीय पुलिस ने मंदिर में प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प पर कार्रवाई की है।  पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई कई घटनाओं की जांच शुरू कर दी है, जिनके वीडियो में यह देखा जा सकता है कि लोगों पर झंडों और लाठियों से हमले किये जा रहे हैं। पील पुलिस के बयान में कहा गया है कि 21 डिवीजन आपराधिक जांच ब्यूरो और ‘स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी)’ के जांचकर्ताओं ने ब्रैम्पटन के इंद्रजीत गोसल को गिरफ्तार किया है और हथियार से हमला करने का उस पर आरोप है। ‘टोरंटो स्टार’ की खबर के अनुसार, गोसल कनाडा में ‘सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे)’ का समन्वयक हैं। एसएफजे भारत में प्रतिबंधित है।
बयान में कहा गया कि गोसल को आठ नवंबर को गिरफ्तार किया गया। उस पर हथियार से हमला करने का आरोप है। गोसल को सशर्त रिहा किया गया है और उसे बाद में ब्रैम्पटन स्थित ‘ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस’ में पेश होना होगा। तीन और चार नवंबर की घटनाओं के दौरान हुई आपराधिक घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। तीन नवंबर को खालिस्तानी झंडे लेकर आए प्रदर्शनकारियों की लोगों के साथ झड़प हुई और उन्होंने मंदिर प्राधिकारियों तथा भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में बाधा डाली। हम आपको बता दें कि इस घटना की कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निंदा की और कहा कि कनाडा के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का स्वतंत्रतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से आचरण करने का अधिकार है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि नयी दिल्ली, कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है।
इस बीच, कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने देश के कुछ नेताओं पर हिंदुओं और सिखों को “जानबूझकर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने” की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडाई मूल के हिंदू और सिख एक तरफ हैं और खालिस्तानी दूसरी तरफ। आर्य की यह टिप्पणी ब्रैम्पटन के एक मंदिर में हिंदुओं पर हमले की घटना के कुछ दिन बाद आई है। आर्य ने कहा कि कनाडा के कई नेता ब्रैम्पटन की घटना को कनाडाई मूल के हिंदुओं और सिखों के बीच संघर्ष के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के जानबूझकर किए गए कृत्यों और खालिस्तानियों के प्रभाव के कारण कनाडा के लोग अब खालिस्तानियों और सिखों को एक जैसा समझने लगे हैं। 
ओंटारियो के नेपियन क्षेत्र से सांसद आर्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कुछ नेता जानबूझकर इस हमले के लिए खालिस्तानियों को जिम्मेदार ठहराने और उनका जिक्र करने से बच रहे हैं। वे अन्य तत्वों पर दोष मढ़ रहे हैं। वे इसे हिंदुओं और सिखों के बीच एक मुद्दे के रूप में पेश करके कनाडा के लोगों को गुमराह कर रहे हैं।” आर्य ने कहा, “खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा मंदिर पर किए गए हमले को लेकर नेता हिंदुओं और सिखों को इस तरह से चित्रित कर रहे हैं कि वे एक-दूसरे के खिलाफ हैं। जबकि, यह सच्ची तस्वीर नहीं है। हकीकत में हिंदू-कनाडाई और सिख-कनाडाई एक तरफ हैं और खालिस्तानी दूसरी तरफ।”

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