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Afghanistan में Pakistan की एयरफोर्स ने किया हमला, भड़का तालिबान!

अपनी जनता को आटा तक नहीं खिला पा रहे और दुनिया के सामने कटोरा लेकर खड़े हैं।  लेकिन इसके साथ ही पड़ोसियों के घर में घुसकर बमबारी कर रहे हैं। जिस पाकिस्तान की अपनी जमीन आतंकियों की फैक्ट्री बनी हुई है, उसी की बुजदिल सेना ने आधी रात के अंधेरे में अफगानिस्तान के मासूम लोगों पर हवाई हमले कर दिए। 11 मासूम बच्चे, वो बच्चे जिन्होंने अभी दुनिया देखी तक नहीं थी, उन्हें पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने मलबे में दफन कर दिया। पाकिस्तान समझ रहा है कि वो ताकतवर है। नहीं, यह उसकी ताकत नहीं बल्कि हार की बौखलाहट है। दरअसल, बीती रात पाकिस्तानी एयरफोर्स के विमानों ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को पार किया। जैसा कि अफगानिस्तान का दावा है और तालिबान ने इसकी पुष्टि भी की। निशाना कोई छावनी नहीं थी। निशाना थे कुनार खोस और पकिका के वो रिहाइशी इलाके जहां आम अफगानी नागरिक सुकून से रहते थे। 

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जबीहुल्लाह मुजाहिद ने साफ कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दी है। पाकिस्तान ने उन घरों पर बम गिराए जहां परिवार सो रहे थे। यह हमला नहीं यह सरेआम कत्लेआम है।  पाकिस्तान जो कल तक मुस्लिम उमा की दुआही देता था आज उसी ने बच्चों की जान ले ली। अब दुनिया पूछ रही है जिस देश के पास अपने जहाजों में तेल डलवाने के पैसे नहीं है वो युद्ध का नाटक क्यों कर रहा है? दरअसल यह पाकिस्तान की पुरानी फितरत है। जब घर में आग लगी हो तो पड़ोसी पर पत्थर फेंको। पाकिस्तान के अंदर गृह युद्ध जैसा माहौल है और अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है। लेकिन अपनी जनता को बेवकूफ बनाने के लिए उसने अफगानिस्तान के निर्दोष लोगों की जान ले ली। लेकिन पाकिस्तान भूल गया कि 1971 वाला दौर नहीं है। अफगानिस्तान के लड़ाके वो हैं जिन्होंने महाशक्तियों को घुटने पर टेकने को मजबूर कर दिया। अगर तालीबान ने अपनी डूरंड लाइन वाली तोप खोल दी तो लाहौर और इस्लामाबाद तक भागने की जगह भी पाकिस्तानी सेना और वायु सेना को नहीं मिलेगी। 

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अब सवाल यह है कि क्या ये 11 मासूम पाकिस्तान के लिए खतरा थे? नहीं बिल्कुल नहीं। अफगानिस्तान की धरती पर आज मातम जरूर है। 13 लोगों ने अपनी जान गवाई और जान लेने वाला पाकिस्तान है जिसमें महिला और बुजुर्ग भी शामिल है। 14 लोग अस्पतालों में तड़प रहे हैं। जब उल्ला मुजाहिद का गुस्सा अब बारूद बन चुका है। अफगानिस्तान ने इसे अमानवीय अपराध कहा है और जानकारों का कहना है कि यह पाकिस्तान का आखिरी दांव है। वो अफगानिस्तान को उकसा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति मिल सके। 

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