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15 अगस्त को होने वाली है ट्रंप-पुतिन की मुलाकात, उससे पहले ही किम जोंग ने पलट डाला पूरा खेल

पिछले कुछ महीनों से आप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लगातार बोलते हुए देख रहे होंगे। कभी वो भारत और पाकिस्तान को लेकर सीजफायर वाले मुद्दे पर बोलते हैं। कभी उनके जुबान से टैरिफ वाली धमकी निकलती है। लेकिन अब से ठीक एक दिन बाद ट्रंप बोलेंगे नहीं बल्कि सिर्फ सुनेंगे। दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो पुतिन को सुनना चाहते हैं। ताकी हम समझ सकें कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। इस बैठक का सुझाव पुतिन ने दिया है। ट्रंप इस मुलाकात में पुतिन से साफ कहेंगे कि यूक्रेन में युद्ध को अब खत्म करना होगा। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि मैं पुतिन से मिलने जा रहा हूं। शायद पहले दो मिनट में ही पता चल जाएगा कि कोई समझौता हो सकता है या नहीं। ट्रंप को भरोसा है कि यह मुलाकात दोनों देशों के लिए बेहतर रास्ता निकाल सकती है। 

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता ने साफ कहा है कि ट्रंप पुतिन संग मीटिंग को फील करना चाहता हैं। इसका सीधा मतलब है कि अलास्का में होने वाली मीटिंग एकतरफा वार्ता की तरह होगी। जहां यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन अपना सीजफायर प्लान बताएंगे और ट्रंप उस प्लान को सुनने के बाद विचार करेंगे। अमेरिका इशारा दे रहा है कि पुतिन युद्ध विराम के लिए उत्सुक हैं। लेकिन इस खबर से इतर रूस से बेहद ही दिलचस्प खबर आई है। ट्रंप से मुलाकात करने से ठीक पहले पुतिन ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से फोन पर बात की है। उत्तर कोरियाई मीडिया के मुताबिक पुतिन ने किम जोंग को उत्तर कोरियाई सेना भेजने के लिए धन्यवाद दिया। किम जोंग उन ने दोहराया कि वो रूस के साथ अपनी दोस्ती को एक लेवल ऊपर ले जाएंगे।

एक स्तर आगे ले जाने  का मतलब है कि उत्तर कोरिया रूस के साथ सामरिक सहयोग को बढ़ाएगा। पहले से ही उत्तर कोरिया फौज पश्चिमी रूस में तैनात है। यूक्रेन युद्द के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस को लंबी दूरी की मिसाइल उपलब्ध कराई। ट्रंप से मुलाकात से ठीक पहले किम जोंग से बात करके पुतिन ने ट्रंप को कुछ महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। पुतिन ने पहला इशारा ये दिया कि अब भी अमेरिकी विरोधी खेमा सामरिक तौर पर रूस के साथ खड़ा है। दूसरी बात ये रही कि अगर ट्रंप ने पुतिन पर दबाव बनाने की कोशिश की तो उसके बदले में उत्तर कोरिया भी जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर प्रेशर बढ़ा सकता है जो अमेरिका के मित्र देश माने जाते हैं। इसके साथ ही पुतिन मजबूर होकर सीजफायर करने नहीं आ रहे हैं। वो अपनी शर्तों पर ही सीजफायर करेंगे। 

गौरतलब है कि डॉनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में दावा किया था कि वह यूक्रेन युद्ध 24 घंटे में खत्म कर सकते है, लेकिन समय के साथ उनकी बयानबाजी और रुख बदलते रहे। पुतिन के प्रति शुरुआती नरमी के बाद, उन्होंने उनके अड़ियल रुख और युद्ध लंबा खींचने के लिए आलोचना की। वही, फरवरी मे ओवल ऑफिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेस्की से तीखी बहस के बाद ट्रंप का रुख उनके प्रति नरम पड़ा और उन्होंने पैट्रियट मिसाइल देने का वादा किया, हालांकि बाद में सैन्य सहायता अस्थायी रूप से रोक दी। पुतिन को लेकर भी ट्रंप के बयानों मे प्रशंसा से निराशा तक का बदलाव देखा गया। 

 

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