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अल्लाह का नाम लेकर महिलाओं पर बांग्लादेशी नेता ने जो कहा, सब हैरान!

बांग्लादेश से एक ऐसा नया बयान सामने आया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान करके रख दिया है। यह बयान सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि महिलाओं की भूमिका, उनकी सुरक्षा और उनके अधिकारों पर सीधा सवाल खड़ा करता है। एक बार फिर से बांग्लादेश की राजनीति में कट्टरपंथी सोच खुलकर सामने आ गई है और यह बयान आया है कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात इस्लामी के प्रमुख शफीक उर रहमान की तरफ से। तो सवाल सीधा उठता है कि जिस देश को दशकों तक महिलाओं ने लीड किया वहीं पर आज महिला नेतृत्व को असंभव बताया जा रहा है। दरअसल जमात इस्लामी प्रमुख शफीक उर रहमान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी कट्टरपंथी सोच का एक नमूना पेश किया। उन्होंने बयान देते हुए यह कहा कि हमारी पार्टी में कभी भी कोई महिला प्रमुख नहीं बन सकती। उन्होंने इसके पीछे धार्मिक दायित्व और जैविक सीमाओं को उनका तर्क दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अल्लाह ने पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग बनाया है। पुरुष बच्चे पैदा नहीं कर सकते। उनका ख्याल नहीं रख सकते और वहीं जो यह काम है वो महिला कर सकती है। 

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जो पुरुष नेता है वह अच्छे से बाहर के काम संभाल सकता है। लेकिन महिला नेता वह काम नहीं कर सकती। इसलिए महिलाओं का जो नेतृत्व है वो बच्चों के लिए है। वह घर के लिए है। यह बयान बता दें कि ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर पहले से ही गंभीर बहस चल रही है। इस बयान की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बांग्लादेश वही देश है जहां पिछले 33 वर्षों में से 31 वर्षों तक सत्ता महिलाओं के हाथ में रही है। 1991 से लेकर अभी में हाल तक मतलब शेख हसीना के पतन तक और खालिदा जिया ये दोनों ही वो महिला नेता रही हैं जिन्होंने बांग्लादेश की कमान बखूबी संभाली है। ये दोनों ही महिलाओं ने देश की प्रधानमंत्री के रूप में लगातार शासन किया है बांग्लादेश में बांग्लादेश की सत्ता में और आज जिस पुरुष के हाथ में बांग्लादेश की कमान है उसके आते ही महज कुछ महीने हुए हैं। साल ही हुए हैं। उस पुरुष नेता के आते ही बांग्लादेश में जो एक पीस प्राइज विनर है उसके आते ही बांग्लादेश में क्या कुछ हो रहा है वह पूरी दुनिया से छिपाई नहीं है और वही आज उसी बांग्लादेश में महिला नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 

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ये एक बहुत बड़ी विडंबना है। यानी कि इसे आप ऐसे सोच सकते हैं, समझ सकते हैं कि जिस देश का नेतृत्व दुनिया ने महिला हाथों में देखा है, आज वही महिला नेतृत्व को प्रैक्टिकल नहीं बताया जा रहा है बांग्लादेश में। अब जरा आंकड़ों पर नजर डालते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश की राजनीति आज भी बड़े पैमाने पर पुरुष प्रधान बनी हुई है। 12 फरवरी को होने वाले चुनावों के लिए दाखिल किए गए तकरीबन 2500 नामांकन पत्रों में से सिर्फ 109 महिला उम्मीदवार हैं। यानी कुल उम्मीदवारों का जो महज परसेंटेज अगर हम देखें तो 4.2%। इतना ही नहीं चुनाव लड़ रहे 50 राजनीतिक दलों में से 30 दलों ने एक भी महिला उम्मीदवार चुनावों में नहीं उतारी है जो हाल ही में अब महज कुछ ही दिनों में बांग्लादेश में होने वाले हैं। 

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