चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। बांग्लादेश में आम चुनाव से महज 72 घंटे पहले ताजा हिंसा की घटना सामने आई है, जिसने पूरे चुनावी अभियान की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया।
बता दें कि देर रात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह हिंसा उस समय भड़की जब बीएनपी कार्यकर्ताओं ने जमात पर एक कार्यक्रम के दौरान लोगों में नकद राशि बांटने का आरोप लगाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बीएनपी समर्थक विरोध दर्ज कराने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे, जिसके बाद जमात ने भी अपने समर्थकों को जुटा लिया और मामला देखते ही देखते सड़क पर हिंसक टकराव में बदल गया। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब चुनाव प्रचार समाप्त होने में कुछ ही घंटे बचे हैं और 10 फरवरी की सुबह साढ़े सात बजे प्रचार थम जाना है।
गौरतलब है कि बीते छह हफ्तों में चुनावी हिंसा से जुड़ी घटनाओं में कई लोग घायल हो चुके हैं, जिससे मतदान से पहले तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, टकराव की आशंका भी गहराती जा रही है।
12 फरवरी को होने वाला यह आम चुनाव बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। करीब 12.7 करोड़ मतदाता इस चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि अगस्त 2024 में हुए जनआंदोलन के बाद शेख हसीना का 15 साल का शासन खत्म हुआ था और अवामी लीग को चुनाव लड़ने से बाहर कर दिया गया है।
कई मतदाताओं का कहना है कि यह एक दशक से अधिक समय में पहला ऐसा चुनाव है, जहां वास्तविक मुकाबले की उम्मीद दिखाई दे रही है। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सरकार बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिलने का भरोसा है।
वहीं अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव को एक “लोकतांत्रिक उत्सव” बताते हुए निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतदान का वादा किया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि लगातार हो रही हिंसा से जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
यह चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। गौरतलब है कि हालिया अशांति के चलते बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसे संस्थानों से मदद लेनी पड़ी। साथ ही, चुनाव परिणाम क्षेत्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं, जहां भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों की दिशा बदलने की संभावना जताई जा रही है।
युवा मतदाताओं के लिए यह चुनाव खास महत्व रखता है। पहली बार वोट डालने जा रहे कई युवाओं को उम्मीद है कि अगली सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूत करेगी। जैसे-जैसे प्रचार के अंतिम घंटे नजदीक आ रहे हैं, देश एक ऐसे फैसले की ओर बढ़ रहा है जो आने वाले वर्षों की राजनीति और नीति तय कर सकता है।