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PoK में आजादी के लिए उतरे 70 हजार लोग, युद्ध को तैयार!

अब कुल 70 हजार से अधिक लोग पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग कितने ज्यादा भड़के हुए हैं पाकिस्तान की सरकार पर। क्योंकि पाकिस्तान की सरकार जिस तरीके से पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर अपना राज कायम रखने के लिए आम लोगों पर जुल्म सितम कर रही है। उसको लेकर आखिरकार लोगों ने फुल एंड फाइनल मूड बना लिया है जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर आम आवाम का यह फूटता हुआ गुस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा है। हर कश्मीरी का गुस्सा  प्रदर्शन में दिख रहा है, वो एक दिन, दो दिन, तीन दिन, चार दिन नहीं बताया जा रहा है कि करीब-करीब 14 दिन से यही कमोबेश हालत है पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के अंदर जहां पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। और हालात ऐसे हैं साथियों जहां लोग खुलेआम यह कह रहे हैं कि अब जो हक है वह लेकर रहेंगे। चाहे इसके लिए उन्हें जान क्यों ना देनी पड़ जाए। 

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इस आंदोलन में बच्चे, इस आंदोलन में बूढ़े, इस आंदोलन में जवान हर कोई शामिल है। क्योंकि हर किसी की मांग है बड़ी संख्या में शामिल होकर कि अब पाकिस्तान से उन्हें आजादी चाहिए और पाकिस्तान के खिलाफ वो लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे का विरोध जिस तरीके से रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में बीते 11 दिनों से दिख रहा है। जहां 70ज़ से अधिक प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। उससे पता चलता है कि हालात सामान्य नहीं है। और यह मुनीर जो पूरी दुनिया में घूम के ढिंढोरा पीट रहा है अपने मीडिएशन का। यह जो शहबाज शरीफ है जो कह रहा है कि वह दुनिया में शांति लाने के लिए काम कर रहा है वो उसके अपने ऑक्यूपेशन के अंदर उसके कब्जाए हुए जमीन पर विद्रोह की आग जल रही है और हालात ऐसे हैं कि इस वक्त अगर उस भीड़ के सामने मुनीर चला जाए तो मुझे नहीं पता कि वह भीड़ क्या करेगी। इंटेलिजेंस सूत्र कहते हैं कि कई कस्बों और गांवों में भी नए विरोध प्रदर्शन। इसके बाद शुरू हो गई इन तस्वीरों के बाद और बताया जाता है कि सुधनोती जिले के तरार खेल में करीब 10 12 साल के स्कूली बच्चे सार्वजनिक चौराहे पर भी इकट्ठा हुए आजादी के नारे लगाए। मढोल इलाके में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकाला। महिलाओं ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इसके साथ ही इलाके के में जो कब्जे और अधिकारों की कमी का विरोध हो रहा है। रावलकोट के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर कई स्कूली बच्चे तख्तियां लेकर पहुंचे। इन तख्तियों पर लिखा था कि पाकिस्तानी सेना बाहर आ गई है। 

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पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों को मार रही है। कश्मीर पर पाकिस्तानी हमला हो रहा है। हमें बुनियादी अधिकार चाहिए। हमें मुफ्त शिक्षा चाहिए। आंदोलन में बच्चे की भागीदारी की सबसे अहम तस्वीरों में से एक माना जा रहा है। क्योंकि यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा चिंता का कारण है कि भाई बच्चों तक को आवाज उठानी पड़ रही है पाकिस्तान के इस ऑक्यूपेशन की। इससे जो संकेत मिल रहा है वो ये कि पीओके में राजनीतिक दबाव, आर्थिक परेशानियां, सेना का जो एक तरीके से दमनकारी नीति है युवा पीढ़ी के अंदर इससे बड़ी नाराजगी है, गुस्सा है, आग बबूला है और इसीलिए यह आंदोलन की जो शक्ल है वो भड़कती जा रही है और इस आंदोलन के प्रमुख आयोजक सरदार अमन खान ने रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में जो है हजारों लोगों को संबोधित भी किया है। हूं। आप समेत एक एक खान से कहता हूं। पूरी कौम से कहता हूं इन 53 चोरों समेत पाकिस्तान का कोई सियासतदान उसके बाद कश्मीर की गलियों में नहीं आ सकता। नहीं आ सकता। अगर हम जिंदा नहीं रहेंगे तो तुम भी इस कदर में जिंदा नहीं रहोगे। अमन का पैगाम है। अमन का पैगाम ये है कि जो मुतालबात हमारे हैं वो मुतालबात जो तुमने मायने किए हुए हैं वो मुतालबात पूरे करो। जायज मुतालबात पूरे करो। यहां के लोगों को जो है वो मौका दो। यहां के आवाम को मौका दो। यही तुम्हारे पास रास्ता है। इसके अलावा तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है। और हमारे पास ऑप्शन है। हमारे पास अल्हम्दुलिल्लाह ऑप्शन है। तुम्हारे पास कोई ऑप्शन नहीं है।
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