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ऋषिकेश-भानियावाला परियोजना: भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का काम तेज

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के संवेदनशील हाथी गलियारे में प्रस्तावित ऋषिकेश-भानियावाला चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। सोमवार को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू किया गया। इस चौड़ीकरण परियोजना के अंतर्गत कुल 3,000 पेड़ों को काटने की योजना है, जिसका पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र पिछले कई दिनों से विरोध कर रहे हैं।

पेड़ों को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों ने दशकों पहले गौरा देवी के नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक चिपको आंदोलन की राह चुनी और वे पेड़ों से चिपक गए। हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को हटाकर वाहनों में बैठाया और वहां से ले गई। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी भावुक हो गए और उन्होंने सरकार पर विकास के नाम पर प्राकृतिक धरोहर का कत्ल करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन में शामिल स्थानीय नागरिक बीना वर्मा ने दुख जताते हुए कहा कि विकास के नाम पर इस प्राकृतिक संपदा को नष्ट करना उचित नहीं है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर इसी तरह हरे-भरे जंगल काटे गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह केवल एक कहानी बनकर रह जाएगा। पर्यावरणविदों का भी यही तर्क है कि हाथियों के इस महत्वपूर्ण गलियारे में पेड़ों के कटने से न केवल वन्यजीवों का आवास छीनेगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ेगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से मिट्टी के कटाव और भूजल स्तर पर भी बुरा असर पड़ेगा। प्रख्यात पर्यावरणविद अनूप नौटियाल ने इसे विडंबना बताया कि एक तरफ पौधारोपण के बड़े-बड़े आह्वान किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने जंगलों को काटा जा रहा है। विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि वह जंगलों को न्यूनतम क्षति पहुंचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों या आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों पर विचार करे।

वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस परियोजना का बचाव किया है। एनएचएआई के देहरादून परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने स्पष्ट किया कि सड़क का डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि डब्लूडब्लूएफ-इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सुझावों पर हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास और पुलिया जैसी वैज्ञानिक संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

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