कीव, तीन सितंबर भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 2022 से जारी यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए ‘‘किसी भी तरह की मदद’’ करने को तैयार है। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कीव में अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के साथ व्यापक बातचीत की। बातचीत के बाद, सिबिहा के साथ एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत ने हमेशा यही कहा है कि यह दौर युद्ध का नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे।’’
यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने भारत को एक वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा कि उनका देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस अपील का स्वागत करता है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।
मोदी ने हाल में, बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के दौरान यह अपील की थी। जयशंकर ने कहा, ‘‘संघर्ष के हर गुजरते दिन का मतलब है और ज़्यादा मौतें और और ज़्यादा तबाही। जाहिर है, इसका समाधान शामिल पक्षों को ही निकालना है।
लेकिन, अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं।’
भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की अपील करता रहा है। जयशंकर ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी की युद्ध खत्म करने की अपील के अनुरूप, मेरी यात्रा बातचीत और कूटनीति की संभावनाओं पर केंद्रित है। मैं आज यूक्रेनी पक्ष द्वारा साझा किए गए विचारों और रुख को अपने साथ ले जाऊंगा।’’
इससे पहले, यूक्रेन के विदेश मंत्री ने अंतहीन युद्ध को समाप्त करने की ओर बढ़ने संबंधी प्रधानमंत्री मोदी की अपील का स्वागत करते हुए कहा कि उनका देश ‘‘कूटनीति के लिए तैयार है।’’
सिबिहा ने कहा, ‘‘भारत एक वैश्विक शक्ति है और हम प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील का स्वागत करते हैं जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध को समाप्त करने की ओर बढ़ने की बात कही है।’’
जयशंकर का कीव दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब इस हफ्ते यूक्रेन की राजधानी में हुए रूसी हमले में एक भारतीय की मौत हो जाने को लेकर नयी दिल्ली ने चिंता जताई है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि यह घटना उस युद्ध के बड़े संदर्भ में हो रही है जो 2022 से जारी है। दो दिन पहले, कीव में हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई थी। हम हर जनहानि पर शोक व्यक्त करते हैं और प्रत्येक पीड़ित के परिजन के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं।’’
पिछले कुछ महीनों में हुई कई मुलाकातों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘आज हमारी बातचीत बहुत खुलकर और बेबाकी से हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी बातचीत में इस संघर्ष से जुड़े कुछ खास पहलू भी सामने आए।
इनमें सबसे अहम है वाणिज्यिक जहाजों पर हमले। भारतीय नाविक कई देशों के झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं और दुर्भाग्य से वे भी इन हमलों का निशाना बने हैं।’’
जयशंकर ने सिबिहा को अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक के लिए अपने सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण दिया।
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