🌍 बलिया में एकात्म मानववाद के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को ‘समर्पण दिवस’ के रूप में मनाया गया। प्रबुद्ध जनों और भाजपाकार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को पंडित दीनदयाल चबूतरा पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
🕊️ युवा समाजसेवी व भाजपा नेता अनूप सिंह ने कहा कि “अंत्योदय का संकल्प हमारा, हर चेहरे पर मुस्कान हो। राष्ट्र ही सर्वोपरि है और अंतिम व्यक्ति का उदय ही भारत की सच्ची विजय है।” पंडित जी की यही अवधारणा पूरे विश्व परिवर के लिए थी। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए ‘लक्ष्य अंत्योदय, पथ अंत्योदय और प्राण अंत्योदय’ को ही हमें जीवन का मूलमंत्र बनाना चाहिए।
🌟 पंडित दीनदयाल जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उपस्थित लोगों के बीच उनकी जीवनी पर आधारित पुस्तकों का वितरण किया गया। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके त्यागमयी जीवन और एकात्म मानववाद के दर्शन से परिचित कराना रहा, ताकि समाज में वैचारिक चेतना जागृत हो सके।
📚 कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से अरविंद शुक्ला, राजीव मोहन चौधरी, सत्य प्रकाश सिंह, अनूप सिंह, सत्येन्द्र सिंह, देवेंद्र सिंह, संजय चौबे, विनोद तिवारी, पीयूष चौबे, दिविजय सिंह, पंकज सिंह, शिव प्रकाश सिंह, प्रमोद सिंह, डब्लू सिंह, पंकज राय, अमित सिंह, सोनू सिंह, ओम नारायण चौबे, दिनेश राय, भोला सिंह, मनोज पांडेय, बालेश्वर नाथ सिंह, कमलेश पांडेय, प्रमोद पांडेय, अभिषेक गुप्ता सेठ, अमित राय, अंकित, अनुराग, अभिषेक, आयुष, ओम प्रकाश, अमित गुप्ता, देवव्रत दुबे, भीरुगनाथ राजभर, श्रीवास्तव इत्यादि सम्मिलित रहे।
🗓️ जैनसियू में पं.दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में गोष्ठी का आयोजनबलीया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के स्मृति दिवस पर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया गया। इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में दीनदयाल का व्यक्तित्व और विचार विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
🎤 मुख्य अतिथि प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्ता, गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक दृष्टि- एकात्म मानववाद एवं राष्ट्रवाद पर चर्चा की। कहा कि दीनदयाल जी का दर्शन भारतीय परंपरा से प्राप्त और अपनिषदिक दर्शन एवं अद्वैत दर्शन से अनुप्राणित था। कहा कि दीनदयाल जी का दर्शन व्यक्तित्व, समष्टि, सृष्टि और परमेष्ठि की यात्रा है, जो व्यक्ति को एकात्मता का अनुभव कराता है।
🌿 कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के युगानुकूल एवं समयानुकूल विचार की चर्चा की। कहा कि भारत का विकास भारतीयता परंपरा से प्राप्त और प्राप्त दर्शन से प्रभावित होना चाहिए, विदेशी विचारों से देश का भला नहीं हो सकता। कहा कि अर्थ का अभाव और प्रभाव दोनों मनुष्य को पथच्युत करते हैं। दीनदयाल जी आर्थिक लोकतंत्र की बात करते हैं, जिसमें हर- एक हाथ को काम का विचार दिया गया है।
![]()

