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International Yoga Day: 40 में चाहिए 30 वाली Fitness? एक्सपर्ट से जानें ये Anti-aging secret

खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियां काफी बढ़ रही है। पहले के समय में बढ़ती उम्र में अक्सर एनर्जी, ताकत और फ्लेक्सिबिलटी की कमी से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज कई महिलाएं 40 की उम्र में थकी हुई रहती हैं और न ही फिट नजर आती है। इस उम्र में खुद को रोकने की कोशिश नहीं करें, बल्कि शरीर और मन को बेहतर तरीके से सपोर्ट करने का है।
“40 की उम्र अब नई शुरुआत का प्रतीक बनती जा रही है” यह केवल एक लोकप्रिय वाक्य नहीं, बल्कि आज की बदलती लाइफस्टाइल और सोच को दर्शाता है। आधुनिक शोध और योग विज्ञान दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि दैनिक दिनचर्या का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, पर्याप्त आराम और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाकर व्यक्ति बढ़ती उम्र के प्रभावों को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ एवं ऊर्जावान बना रह सकता है।
बढ़ती उम्र में योग क्यों है खास?
आज दुनियाभर में इंटरनेशनल योगा डे मनाया जा रहा है। इसलिए योग सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि शरीर, सांसों और मन के बीच संतुलन बनाने वाला प्रोसेस है। नियमित तौर पर योग करने से शरीर फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है मसल्‍स मजबूत होती है, पोश्चर सही होता है और ब्‍लड सर्कुलेशन को सपोर्ट मिलता है। योग एक्सपर्ट के अनुसार, योग का प्रभाव सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 40 की उम्र में 30 उम्र जैसी फिटनेस कैसे पाएं।
सिद्ध वॉक
खासतौर पर सिद्ध वॉक करने से फिगर-8 या इनफिनिटी शेप में धीरे-धीरे चलते हुए सांस और एकाग्रता पर ध्यान दिया जाता है। इस समय शरीर को रिलैक्स रखते हुए संतुलित गाति प्राप्त होती है।
 फायदे
 – यह शरीर को बैलेंस और कोऑर्डिनेशन बेहतर करता है।
 – बॉडी की गतिशीलता बनाए रखता है।
 – डाइजेशन और ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट करता है।
 – मन को शांत और केंद्रित रखता है।
त्रिकोणासन
पैरों के बीच दूरी बनाकर खड़े होकर एक पैर को बाहर की ओर रखें और दोनों ही हाथों को फैलाएं। धीरे-धीरे शरीर को एक तरफ झुकाएं। सांस को सामान्य रखें।
फायदे
-पैरों को मजबूत करता है।
 – हिप्स और रीढ़ के फ्लेक्सिबिटी को बढ़ा सकता है।
 – शरीर के पोश्चर और बैलेंस को बेहतर बनाता है।
भ्रामरी प्राणायाम
इस आसान को करने के लिए रीढ़ को सीधा करके बैठ जाएं। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी हल्की आवाज निकालें।
फायदे
 – यह मन को शांत रखता है।
 – तनाव कम करता है और एकाग्रता बनाए रखता है।
 – मानसिक संतुलन बनाए रखता है। 

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