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दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र स्थित न्यू मोती बाग आवासीय परिसर में बने आधुनिक खेल सुविधाओं को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। यहां तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और अन्य खेल सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इन तक पहुंच सीमित लोगों को ही मिलती है। इसी बीच एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन सुविधाओं के निर्माण और मरम्मत में राष्ट्रीय खेल विकास कोष यानी एनएसडीएफ के पैसे का इस्तेमाल किया गया है।
बता दें कि राष्ट्रीय खेल विकास कोष का गठन खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और खेल ढांचे के विकास के लिए किया गया था। मौजूद जानकारी के अनुसार, इसी फंड से ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए चलाई जाने वाली टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना जैसी बड़ी योजनाओं को भी सहायता दी जाती है।
हालांकि अब सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच इस फंड से करोड़ों रुपये सिविल सेवा अधिकारियों से जुड़े संस्थानों और आवासीय परिसरों पर खर्च किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, सेंट्रल सिविल सर्विसेज कल्चरल एंड स्पोर्ट्स बोर्ड और न्यू मोती बाग आवासीय परिसर के लिए करीब 6.2 करोड़ रुपये जारी किए गए।
गौरतलब है कि यह राशि उस समय खर्च की गई जब राष्ट्रीय खेल विकास कोष में आने वाले योगदान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में इस फंड में लगभग 85 करोड़ रुपये का योगदान मिला था, जो वर्ष 2025-26 में घटकर करीब 37 करोड़ रुपये रह गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अन्य संस्थाओं को भी इस फंड से सहायता दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान और छत्तीसगढ़ की दो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्थाओं को खेल प्रतियोगिताओं और ढांचा निर्माण के लिए लगभग 2.66 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा मालदीव, जमैका और सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइंस के क्रिकेट बोर्डों को क्रिकेट सामग्री उपलब्ध कराने पर भी करीब 1.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय खेल विकास कोष का संचालन केंद्रीय खेल मंत्री की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यीय परिषद के तहत होता है। वहीं अनुदान प्रस्तावों को मंजूरी देने का काम खेल मंत्रालय के अधिकारियों की समिति करती है। इसी व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जिन संस्थानों को लाभ मिला, वे कहीं न कहीं उसी प्रशासनिक ढांचे से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद खेल फंड के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा तेज हो गई है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों की तैयारी और जमीनी स्तर के खेल ढांचे को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए संसाधनों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
