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Pakistan Hockey ने घरेलू ढांचे पर नहीं दिया ध्यान: पूर्व कप्तान सलमान अकबर

(मोना पार्थसारथी)
एम्सटेलवीन, 15 अगस्त विश्व कप की सबसे कामयाब टीम रही चार बार की चैम्पियन पाकिस्तान में हॉकी के गिरते स्तर के लिये घरेलू ढांचे के अभाव को कसूरवार ठहराते हुए पूर्व कप्तान और दो बार के ओलंपियन सलमान अकबर ने कहा कि भारतीय हॉकी बीजिंग ओलंपिक 2008 के झटके के बाद समय रहते चेत गई और नतीजा लगातार दो ओलंपिक पदक के रूप में मिला। पाकिस्तान के लिये 230 मैच , 2004 और 2008 ओलंपिक खेल चुके दिग्गज गोलकीपर सलमान ने यहां को दिये खास इंटरव्यू में पाकिस्तान हॉकी के पतन के कारणों के बारे में पूछने पर कहा ,‘‘ यूं तो कई कारण हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण है कि पाकिस्तान ने कभी भी अपनी हॉकी के घरेलू ढांचे को मजबूत करने की कोशिश नहीं की। आपके घर में खिलाड़ियों के लिये प्लेटफॉर्म नहीं है।

खिलाड़ी बस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में मौका मिलता है तो वहां या घरेलू शिविरों तक व्यस्त रहते हैं। घरेलू ढांचा नहीं के बराबर है जहां से प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलने चाहिये।’’
पाकिस्तान आठ साल बाद विश्व कप में वापसी कर रहा है और प्रो लीग के पिछले सत्र में टीम आखिरी स्थान पर रही थी। अपने खेलने के दौर से आज की भारतीय टीम में आये बदलाव के बारे में पूछने पर नीदरलैंड में बसे 44 साल के इस पूर्व खिलाड़ी और जापान टीम के गोलकीपिंग कोच ने कहा ,‘‘टीम को छोड़ें , हॉकी ही इतनी बदल गई है।

मैने पैतीस मिनट के दो हाफ वाली हॉकी भी खेली है लेकिन अब चार क्वार्टर का खेल हो गया है। उस दौर की भारतीय टीम ने भी अलग हॉकी खेली और आज की टीम अलग खेल रही है तो कोई तुलना हो ही नहीं सकती।’’
उन्होंने यह भी कहा कि तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने और पेरिस में उसे बरकरार रखने वाली भारतीय हॉकी की मौजूदा पीढी खुशकिस्मत है कि वह ऐसे समय में खेल रही है जब भारतीय हॉकी प्रगति की राह पर है। सलमान ने कहा ,‘‘ यह पीढी खुशकिस्मत है कि ऐसे समय पर आये जब भारतीय हॉकी 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं करने के झटके बाद जाग चुकी थी।

उसके बाद भारत ने अपने घरेलू ढांचे पर काम किया। आज उनके पास हॉकी इंडिया लीग है और पूरे साल का व्यस्त कार्यक्रम है। उसका नतीजा भी मिला और वह भी एक दो साल में नहीं बल्कि तोक्यो ओलंपिक तक इंतजार करना पड़ा।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ उतार चढाव भी आये लेकिन भारत ने अपने कोचों तक को ट्रेनिंग दी और उनके पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का पूल बना।

अब वे हर बड़े टूर्नामेंट में पदक के प्रबल दावेदार के रूप में उतरते हैं।’’
सलमान ने यह भी कहा कि दोनों टीमों की परिस्थितियां चाहे जो हो लेकिन मैदानी प्रतिद्वंद्विता में कोई कमी नहीं आयेगी और पाकिस्तान पिछले दस साल में भारत से जीत नहीं पाने की कसक मिटाने की पूरी कोशिश करेगा। उन्होंने कहा ,‘‘ हाल ही में प्रो लीग में भारत ने पाकिस्तान को आसानी से हराया लेकिन मुझे लगता है कि पाकिस्तान बदला चुकता करने की कोशिश करेगा। लोगों को भारत पाकिस्तान हॉकी देखने में मजा आता है।

हॉकी के लिये यह मैच काफी अहम है।2016 के बाद से पाकिस्तान भारत से नहीं जीता है और उसके पास यह सुनहरा मौका है।मैं दोनों टीमों को शुभकामना देता हूं और उम्मीद है कि अच्छी हॉकी देखने को मिलेगी और गर्मजोशी से ‘हैंडशेक’ भी करेंगे।’’
उन्होंने भारत के युवा गोलकीपरों मोहित एचएस और सूरज करकेरा के बारे में पूछने पर कहा कि पी आर श्रीजेश जैसे दिग्गज के साथ उन्हें काफी सीखने का मौका मिला होगा जो अब काम आयेगा। यह पूछने पर कि क्या भारत को श्रीजेश की कमी खलेगी, उन्होंने कहा ,‘‘ मैं इसके बारे में तो नहीं कह सकता लेकिन एक बेहतरीन कैरियर के बाद पूरी गरिमा के साथ वह रिटायर हुए हैं। अपने कैरियर के आखिरी दिनों में उनका प्रदर्शन अद्भुत रहा।

मौजूदा भारतीय गोलकीपर प्रो लीग और बड़ी टीमों के खिलाफ खेले हैं और उन्होंने श्रीजेश जैसे दिग्गज के साथ रहकर काफी कुछ सीखा होगा।’’
नीदरलैंड में अपना गोलकीपिंग स्कूल शुरू करने के बाद जापान की टीम से जुड़े सलमान ने कहा कि तेजी से बदलती हॉकी में कोचिंग आसान काम नहीं है और खुद को अपडेट रखना पड़ता है। उन्होंने कहा ,‘‘ कोचिंग में मजा आ रहा है लेकिन यह काफी कठिन काम है। जब मैने शुरू किया तो पहला ख्याल आया कि खेलना ज्यादा आसान है।

यह जरूरी नहीं है कि आप बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं तो बेहतरीन कोच भी होंगे। हॉकी बहुत तेजी से बदल रही है और नये नियम आ आते हैं जिनमें आपको अपडेट रहना होता है। अगर आप सीखेंगे नहीं तो टिक नहीं सकेंगे।

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