लोकसभा में विपक्षी दलों के भारी हंगामे के कारण बुधवार को सदन की कार्यवाही को बार-बार रोकना पड़ा। विपक्षी सांसद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयानों, पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की किताब से जुड़े विवाद और अपने 8 साथियों के निलंबन का विरोध कर रहे थे। जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के पास पहुँच गए। इस शोर-शराबे के बीच वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपना बयान पढ़ा, लेकिन हंगामा कम न होने के कारण सदन को शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों के इस व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा और परंपराओं को तोड़ना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को समझाते हुए कहा कि विरोध करने का तरीका नियम और तर्कों के साथ होना चाहिए, न कि नारेबाजी और बैनर दिखाकर। अध्यक्ष ने जोर दिया कि वरिष्ठ नेताओं को सदन के नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन हंगामे में कोई कमी नहीं आई, जिसके कारण प्रश्नकाल और अन्य जरूरी काम ठीक से नहीं हो सके।