असम सरकार ने राज्य में निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जिसे अभूतपूर्व सफलता मिली है। अंबानी-अडानी ने तो असम में निवेश की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की हीं साथ ही देश के अन्य तमाम उद्योग घरानों ने भी निवेश के तमाम ऐलान किये। खास बात यह रही कि अडानी और अंबानी ने असम में निवेश की घोषणाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कीं। जब अडानी और अंबानी भाषण दे रहे थे तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच के नीचे सामने वाली पंक्ति में बैठ कर उन्हें सुन रहे थे।
जहां तक अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी के संबोधन की बात है तो उन्होंने ऐलान किया है कि उनका समूह असम में विभिन्न क्षेत्रों में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। ‘एडवांटेज’ असम शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि उनका समूह राज्य तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए भविष्य में और अधिक निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। अदाणी ने कहा कि यह निवेश हवाई अड्डों, एयरोसिटी, सिटी गैस वितरण नेटवर्क, बिजली पारेषण, सीमेंट और सड़क निर्माण जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। उन्होंने कहा, ”असम विकास को गति देने की स्थिति में है। यह हमारी प्रतिबद्धता और दृष्टिकोण है कि हम अपने और राज्य के लिए भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें।’’
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वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के संबोधन की बात करें तो आपको बता दें कि उन्होंने कहा है कि उनकी कंपनी अगले पांच वर्ष में असम में पांच अलग-अलग क्षेत्रों में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। ‘एडवांटेज असम’ व्यापार शिखर सम्मेलन में अंबानी ने कहा कि यह पैसा असम को प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए तैयार करने के लिए निवेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, ”2018 के निवेश शिखर सम्मेलन में मैंने 5,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी। तब से निवेश 12,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। यह राशि चौगुनी हो जाएगी और हम अगले पांच वर्ष में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।’’ अंबानी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में यह राशि लगाई जाएगी, उनमें हरित व परमाणु ऊर्जा, खाद्य व गैर-खाद्य उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला और रिलायंस के खुदरा स्टोर का विस्तार शामिल है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की बात करें तो आपको बता दें कि उन्होंने कहा है कि असम स्टार्ट-अप का गंतव्य बन रहा है और जल्द ही यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में विनिर्माण का केंद्र बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एडवांटेज असम 2.0 निवेश एवं अवसंरचना शिखर सम्मेलन’ का उद्घाटन करने के बाद कहा कि असम उग्रवादी समूहों के साथ शांति समझौते और सीमा विवादों के समाधान के बाद ‘‘असीमित अवसरों की भूमि’’ के रूप में उभरा है।