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Dehradun-Rishikesh Highway Project: विकास की भेंट चढ़ेंगे हजारों पेड़? चौड़ीकरण पर मचा भारी बवाल

उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भानियावाला और रानीपोखरी के बीच देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने की परियोजना के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। इस सड़क परियोजना के लिए काटे जाने वाले पेड़ों की सुरक्षा के लिए लोग दिन-रात वहां पहरा दे रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर इन पेड़ों को कटने नहीं देंगे।

क्यों भड़के हुए हैं लोग?

इस विरोध प्रदर्शन में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता शिल्पी ने जंगलों की कटाई से होने वाले नुकसानों को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा, “हम यहां बड़े पैमाने पर हो रहे जंगलों के विनाश के खिलाफ खड़े हैं। वे इसे फोर-लेन सड़क बनाने के लिए पेड़ों को काटना चाहते हैं। ट्रैफिक तो सिर्फ शहर के अंदर और चारधाम यात्रा के समय होता है, तो क्या इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में वे पूरे पहाड़ को काटकर फोर-लेन बना देंगे?”
उन्होंने आगे कहा, “हम सभी जानते हैं कि तापमान पहले ही 2.5 डिग्री बढ़ चुका है और जलवायु परिवर्तन हमारे सामने है। ऋषिकेश में अब बहुत कम बारिश होती है, जिसे स्थानीय लोग अच्छे से महसूस कर रहे हैं। जब कोई पेड़ बहुत पुराना होता है, तो वह सिर्फ एक प्रजाति नहीं बल्कि अपने भीतर कई वायरस भी समेटे रहता है। जब हम जंगल काटते हैं, तो सिर्फ पेड़ नहीं मरते, बल्कि कई तरह की बीमारियां भी बाहर आती हैं। अमीर लोग तो गर्मी बढ़ने पर विदेश या दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, लेकिन हम मध्यम वर्ग और गरीब लोग यहीं रहते हैं। आज ऋषिकेश के हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना एसी के रहना मुश्किल है। उत्तराखंड पहले ही 46 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जंगल खो चुका है।”

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स्थानीय निवासियों का रुख

स्थानीय लोग इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं और पेड़ों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े एक स्थानीय वकील एडवोकेट आशुतोष कोठारी ने इस नुकसान की गंभीरता को समझाया है।
उन्होंने बताया, “हम पिछले 5 दिनों से यहां साल के पेड़ों को कटने से बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जो लोग देश छोड़ रहे हैं, वे कहते हैं कि भारत अब सुधर नहीं सकता। लेकिन उत्तराखंड हमारी आखिरी उम्मीद है कि हम कम से कम अपने राज्य को तो सुधार सकें। इन बड़े पेड़ों को मत काटिए जो हमें ऑक्सीजन देते हैं। आपने पेड़ों के ऊपरी हिस्से (कैनोपी) को हटा दिया है, जिससे पूरी धूप सीधे सड़क पर आ रही है और अब गर्मी और बढ़ेगी। हम 15 जुलाई तक का इंतजार कर रहे हैं जब सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना आदेश जारी करेगा। हमने कोर्ट की अवमानना की अर्जी भी लगाई है। ये लोग छोटे-छोटे हिस्सों में पेड़ों को काट रहे हैं। मिट्टी नमी सोखती है, और इस मौसम में पेड़ों को काटने से पर्यावरण को बहुत भारी नुकसान हो सकता है।”

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