बीजेपी की सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों से ‘जेनरेशन Z’ (GenZ) और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच बढ़ती दूरी का पता चलता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कानून बनाकर, बातचीत के ज़रिए और प्रधानमंत्री के सीधे संवाद के माध्यम से इस मामले पर तेज़ी से प्रतिक्रिया दी। ईरानी ने कहा कि संसद में पेपर लीक विरोधी कानून का पास होना और इंस्टाग्राम वीडियो के ज़रिए छात्रों से प्रधानमंत्री मोदी की हालिया अपील यह दिखाती है कि सरकार युवाओं की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है, न कि उनके प्रति उदासीन।
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‘युवा पीढ़ी और सरकार के बीच कोई अलगाव नहीं’
जब उनसे पूछा गया कि क्या छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन युवाओं और सरकार के बीच बढ़ती खाई को दर्शाते हैं, तो ईरानी ने इस धारणा को खारिज करते हुए तर्क दिया कि सरकार की प्रतिक्रिया इसके विपरीत साबित करती है। उन्होंने कहा कि संसद ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद कागज़ लीक रोधी विधेयक पारित किया था और प्रधानमंत्री द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को दिया गया संदेश रचनात्मक सहयोग का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह संसद का बहुत बड़ा अपमान है जब आप कहते हैं कि इस मुद्दे को बस ऊपर-ऊपर से सुलझाया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने एक टास्क फ़ोर्स बनाकर, कानून पास करके और युवा नागरिकों से सीधे बातचीत करके सक्रिय कदम उठाए हैं। ईरानी ने मीडिया के कुछ हिस्सों पर यह आरोप भी लगाया कि वे जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर तो बहुत ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन दूसरी जगहों पर, खासकर झारखंड में छात्रों के ऐसे ही आंदोलनों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।