बलिया में विवाद और कानूनी लड़ाई
🌍 रसड़ा के विधायक उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर कई बड़े विवादों और कानूनी लड़ाइयों से भरा रहा। एक दौर ऐसा भी रहा, जब उनकी विधानसभा सदस्यता तक रद्द कर दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां फैसला उनके पक्ष में आया।
📅 फरवरी 2026 में कैसर का इलाज करा रहे उमाशंकर सिंह के कई ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी भी की थी। उमाशंकर सिंह को 14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने अयोग्य घोषित कर दिया था। उन पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा था। यह मामला विधायक रहते हुए अपने नाम पर सरकारी ठेके लेने से जुड़ा था।
⚖️ लोकायुक्त ने जांच में आरोप सही पाए गए थे। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग की सिफारिश के आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
📝 तब उमाशंकर सिंह ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उमाशंकर सिंह के पक्ष में आया।
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