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अमेरिका से बेहतर संबंधों की बात, रूस संग टाइम-टेस्टेड पार्टनरशिप वाला साथ, ट्रंप के स्टाइल में ही भारत ने US को दिया जवाब, कहा- बेहतर विकल्प से ही खरीदेंगे तेल

ट्रंप द्वारा रूस के साथ भारत की नज़दीकियों की आलोचना करने के बारे में पूछे जाने पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अन्य देशों के साथ नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंध अपनी अपनी योग्यता पर आधारित हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि रूस के साथ भारत की साझेदारी “स्थिर और समय-परीक्षित” रही है। जायसवाल से उन रिपोर्टों के बारे में भी पूछा गया कि कुछ भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल की ख़रीद बंद कर दी है, जिस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसी किसी विशिष्ट जानकारी की जानकारी नहीं है। आप ऊर्जा स्रोत आवश्यकताओं के प्रति हमारे व्यापक दृष्टिकोण से अवगत हैं, हम बाज़ार में उपलब्ध चीज़ों और मौजूदा वैश्विक स्थिति पर नज़र रखते हैं। हमें किसी विशिष्ट जानकारी की जानकारी नहीं है। 

ट्रंप ने कहा कि मुझे इसकी परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है। मुझे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, वे अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को मिलकर नीचे गिरा सकते हैं। उन्होंने भारत की व्यापारिक प्रथाओं की आलोचना करते हुए कहा, “हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है। उनके टैरिफ़ बहुत ज़्यादा हैं, दुनिया में सबसे ज़्यादा में से एक।  ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि भारत हमारा दोस्त है, लेकिन उनके ऊंचे टैरिफ और रूस से सैन्य उपकरण और ऊर्जा खरीद ने उनकी नीतियों को लेकर चिंता है। खासकर तब जब दुनिया यूक्रेन में रूस की हिंसा रोकना चाहती है। इस आधार पर उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और एक एक्स्ट्रा पैनल्टी लगाने का ऐलान किया है। 

ट्रंप ने इस कदम को अस्वीकार्य गैर-टैरिफ बाधाओं को सुधारने की दिशा में उठाया गया बताया है। जिस तरह से ट्रंप कदम उठा रहे हैं भारत और अमेरिका के बीच 87 अरब डॉलर का निर्यात व्यापार दांव पर है। जहां अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह टैरिफ उन कई प्रमुख उद्योगों की कंपटीशन को चुनौती देता है जो पहले से ही वैश्विक मंदी का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने इस टैरिफ को ग्लोबल सप्लाई चेन में अमेरिका की ताकत के रूप में पेश किया। 

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