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18th BRICS Summit: माइकल कुगेलमैन बोले, भारत ने अलग विचारों वाले देशों के बीच बनाई आम सहमति

(दीक्षा राठौड़)
अन्नापोलिस (अमेरिका), 14 सितंबर अमेरिका के एक विश्लेषक ने कहा है कि भारत ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी की और पहले दिन जारी व्यापक साझा घोषणा ने अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच सहमति बनाने की देश की क्षमता को प्रदर्शित किया। ‘अटलांटिक काउंसिल’ में दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि यह घोषणा भारत के शिखर सम्मेलन आयोजित करने की क्षमता और ब्रिक्स समूह की बढ़ती स्वीकार्यता, दोनों को दर्शाती है। ब्रिक्स का वार्षिक शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर तक नयी दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

ब्रिक्स 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रिक्स देशों ने शनिवार को आम सहमति से नयी दिल्ली घोषणापत्र 2026 को अंगीकार किया। इस शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत कई वैश्विक नेताओं ने हिस्सा लिया।

घोषणापत्र में एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों में बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसमें आतंकवाद, संघर्ष की रोकथाम और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर भी जोर दिया गया। घोषणापत्र को लेकर हुई वार्ताओं के दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए भारत ने अहम भूमिका निभाई।

कुगेलमैन ने रविवार को ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम भारत की मेजबानी की भूमिका को सफल मान सकते हैं। यह तथ्य कि पहले ही दिन एक व्यापक साझा घोषणापत्र जारी किया गया, यह दर्शाता है कि भारत अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के समूह के साथ काम करने और आम सहमति बनाने में कामयाब रहा।’’
कुगेलमैन ने भारत की बढ़ती वैश्विक अहमियत की सराहना करते हुए कहा, ‘‘ब्रिक्स के लिए अच्छी बात यह है कि यह आम सहमति के आधार पर काम करता है, ना कि पूर्ण सर्वसम्मति के आधार पर। किसी कदम पर आगे बढ़ने के लिए सहमति रखने वाले देशों का एक महत्वपूर्ण समूह होना जरूरी है और भारत स्पष्ट रूप से इस स्थिति तक पहुंचने में सफल रहा।’’
यह पूछे जाने पर कि अमेरिका इस शिखर सम्मेलन को किस नजरिए से देखता है, कुगेलमैन ने कहा कि अमेरिका में अक्सर ब्रिक्स को गलत तरीके से समझा और पेश किया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक धारणा यह है कि यह अप्रासंगिक है, यह केवल बातचीत का मंच है। दूसरी धारणा यह है कि यह पश्चिमी देशों का मुकाबला करने के लिए बना है। ये दोनों ही बातें गलत हैं।’’
कुगेलमैन ने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से किसी कड़ी सार्वजनिक प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं है, क्योंकि घोषणापत्र में अमेरिका का विशेष रूप से नाम नहीं लिया गया है।

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