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Iran ने ढूंढ़ ली खाड़ी देशों की कमजोर नस, ऐसा वार, घुटनों पर आएंगे अरब देश!

अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अब तक सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही थी। लेकिन अब इस संघर्ष की आंच समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसलिनेशन प्लांट्स तक पहुंच गई है। यह वही प्लांट हैं जिन पर खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से निर्भर करती है। ऐसे में इन संयंत्रों पर हमले केवल युद्ध का हिस्सा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की बुनियादी जरूरतों पर सीधा खतरा माने जा रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमले में हुरमुजगान प्रांत के बोंजी इलाके में स्थित एक डिसलिनेशन प्लांट पूरी तरह से तबाह हो गया है। 

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ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस हमले के बाद करीब 10,000 लोगों की पानी की आपूर्ति ठप हो गई है। जिससे इलाके में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ईरान का कहना है कि नागरिकों के लिए जरूरी जल आपूर्ति व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों की भावना के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके एक पावर प्लांट और वाटर डिसलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया जिससे प्लांट में आग लग गई। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। लेकिन इस तरह के हमले देश की सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर खतरा हैं। 

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कुवैत सरकार ने कहा कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो देश की आवश्यक सेवाएं और आम लोगों की पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। दरअसल खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देशों के लिए डिसलिनेशन प्लांट जीवन रेखा है। यह संयंत्र समुद्र के खारे पानी से नमक और अन्य अशुद्धियां निकालकर उसे पीने योग्य बनाते हैं। रेगिस्तानी इलाकों में जहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित है, वहां यही तकनीक करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कुवैत और ओमान करीब अपनी 90% पानी की जरूरत डिसलिनेशन प्लांट से पूरी करते हैं। बहरीन में यह आंकड़ा 85% है। जबकि सऊदी अरब अपने करीब 70% पानी की जरूरत इस प्रक्रिया के जरिए पूरा करता है। अबू धाबी, दुबई, दोहा, कुवैत सिटी और जिद्दा जैसे बड़े शहर लगभग पूरी तरह इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर है। ऐसे में अगर ये प्लांट बड़े पैमाने पर निशाना बनते हैं तो लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो सकता है। ईरान की स्थिति इससे कुछ अलग है। देश पूरी तरह डिसलिनेशन पर निर्भर नहीं है। लेकिन उसके सूखा प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसलिए ईरान में भी ऐसे प्लांट पर हमला स्थानीय आबादी के लिए गंभीर मानवीय संकट पैदा कर सकता है। 

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