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NEET Paper Leak पर NTA का बेतुका जवाब, Congress सांसद ने मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह की NEET-UG 2026 विवाद पर प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दोनों को बर्खास्त करने की मांग की। टैगोर ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़ा एक गुट इसमें शामिल लोगों को संरक्षण दे रहा है और दावा किया कि एनटीए विवाद की निष्पक्ष जांच से सत्ताधारी दल के कई चेहरे बेनकाब होंगे।

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एएनआई से बात करते हुए टैगोर ने कहा, एनटीए प्रमुख की यह प्रतिक्रिया हास्यास्पद है। हम सभी जानते हैं कि उन्हें अब तक बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ऐसा कभी नहीं करेंगे क्योंकि यह एक गुट है और भाजपा ऐसा कभी नहीं करेगी। यह भाजपा के लोगों के लिए काम करता है, भाजपा नेता इसमें शामिल हैं… अगर निष्पक्ष जांच की जाती है, तो भाजपा के कई चेहरे इसमें शामिल पाए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, एनटीए अधिकारियों द्वारा संसदीय स्थायी समिति को यह सूचित करने के बाद कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से लीक नहीं हुआ था और परीक्षा से पहले केवल कुछ प्रश्न ही सामने आए थे, एनटीए-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच उनकी यह टिप्पणी आई है।

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सूत्रों के मुताबिक, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने समिति को बताया कि परीक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए अनुशंसित कई सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं, जबकि शेष उपायों पर काम जारी है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि कथित लीक एनटीए प्रणाली से नहीं हुआ था और बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) लीक हुए प्रश्नों के प्रसार की जांच कर रही है, जिसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी। उन्होंने एजेंसी की “शून्य-सहिष्णुता” नीति के तहत परीक्षा रद्द करने का बचाव करते हुए कहा कि प्रश्नों के सीमित रिसाव से भी प्रतियोगी परीक्षाओं में जनता का विश्वास कम हो सकता है। संसदीय स्थायी समिति ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की और अगले वर्ष से एनटीए-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रारूप में बदलने के प्रस्तावों पर चर्चा की। NEET-UG 2026 विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव जारी है, जिसके चलते भारत के 551 शहरों और 14 अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।

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