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चलीं धड़ाधड़ गोलियां और…अपने ही परिवार का कातिल क्यों बन गया राजकुमार? नेपाल का सबसे बड़ा शाही रहस्य

नेपाल एक बहुत खूबसूरत देश है। जहां हिमालय के पहाड़ आसमान को छूते हैं। हरेभरे खेत, बहती हुई साफ नदियां, घने जंगल और एकदम ताजा हवा मिलती है यहां। इस देश का सिर्फ नेचर ही नहीं यहां के मंदिर और मोनेस्ट्रीज भी उतने ही खूबसूरत हैं। 2.97 करोड़ की पॉपुलेशन वाला यह देश हमेशा चहल-पहल से भरा रहता है। चाहे वह मंदिरों के बाहर बजने वाली घंटियां हो या लोगों से भरी हुई सड़कें। लेकिन 2 जून 2001 के दिन नेपाल में शांति छाई हुई थी। उस दिन वहां भीड़ तो थी लेकिन नेपाल रॉयल फैमिली के घर के बाहर और वहां पर उस दिन नॉर्मल दिनों से ज्यादा एक्स्ट्रा सिक्योरिटी लगी हुई थी। बाहर खड़े हुए लोग आपस में बातें कर रहे थे। कोई दुखी नजर आ रहा था तो कोई शॉक था और हो भी क्यों ना एक ही रात में किसी ने नेपाल की पूरी रॉयल फैमिली को मार डाला था। हर देश में भगवान को मानने वाले लोग रहते हैं। लेकिन नेपाल में एक ऐसा टाइम भी था जब वहां के किंग को भी उतना ही मानते थे लोग। नेपाल में राजा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता था। किंग को एकता का प्रतीक माना जाता था। किंग के परमिशन के बिना एक पत्ता तक नहीं हिलता था वहां। छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा डिसीजन हमेशा किंग के आदेश के बाद ही लिया जाता था।

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उनकी इस पावर और लोगों के बीच इज्जत की वजह से नेपाल एज अ कंट्री और वहां के लोग भी बिना किसी डर के रहते थे। उन्हें पता था कि उनके किंग सब संभाल लेंगे उनके लिए। इसीलिए कई सालों तक नेपाल में राजशाही का दौर चला। ऐसे ही एक किंग थे नेपाल के 10वें राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव।  किंग वीरेंद्र जितने इंटेलिजेंट थे उतने ही रिस्पांसिबल भी थे। हार्व यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद जब वो नेपाल लौटे तो वो नेपाल की सड़कों पर चलकर वहां के रिमोट एरियाज में जाया करते थे। ताकि वह अपनी आंखों से देख सकें कि उनके देश में लोग कैसे रह रहे हैं। उन्हें किस चीज की तकलीफ है। चाहे वह बड़ी इंडस्ट्रीज को नेपाल में लाना हो या प्रॉपर रोड्स के कंस्ट्रक्शन हो या एनवायरमेंट एंड एनिमल प्रोटेक्शन के लिए रिजर्व्स डेवलप करना हो।  इसीलिए उन्हें बंदूक रखने का बहुत ज्यादा शौक था और उनके पास कहीं सारी बंदूकों का कलेक्शन भी था। जैसे कि राइफल हो गई, शॉर्ट गन हो गई या फिर सब मशीन गन भी थी उनके पास। 

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नेपाल नरेश बीरेंद्र विक्रम और उनकी पत्नी महारानी ऐश्वर्य इनके दो बेटे और एक बेटी थी। एक बेटा दीपेंद्र और दूसरा निरंजन। वहीं एक बेटी। नेपाल नरेश ने दीपेंद्र को क्राउन प्रिंस बना दिया था। मतलब उनके बाद अगला राजा वही होगा। इसी दौरान क्राउन प्रिंस दीपेंद्र को दिव्यानी नाम की लड़की से इश्क हो जाता है। दिव्यानी जिस परिवार से आती थी उसे महारानी ऐश्वर्य पसंद नहीं करती थी और वो चाहती थी कि दीपेंद्र शाही परिवार के ही एक रिश्तेदार सुप्रिया शाह से शादी करे। इसको लेकर मां-बेटे में काफी बहस चली। ऐश्वर्य ने फिर इनकार करते हुए कहा कि उसके लिए दुल्हन उन्होंने चुन ली थी। इस बार प्रिंस दीपेंद्र नाराज़ हो गए और यह कहकर वहां से निकल गए कि वो शादी दिव्यानी से ही करेंगे। इसी दौरान दीपेंद्र ने नेपाल के सुरक्षा विभाग के लिए हथियारों और अन्य उपकरणों की डील का एक प्रस्ताव रखा और अपना सुझाव भी दिया। लेकिन प्रिंस दीपेंद्र के इस प्रस्ताव से उनके पिता और नेपाल नरेश ने किनारा करते हुए अपने फैसले को वरीयता दी। वहीं दूसरी तरफ दीपेंद्र की शादी को लेकर परिवार में लगातार मतभेदों का दौर जारी थी।

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जहां एक तरफ दीपेंद्र ने दिव्यानी से ही शादी करने की बात पर अड़े थे वहीं उनकी मां ऐश्वर्य को यह नागवार था और जिसके पीछे उनकी दलील थी कि दिव्यानी जिस सिंधिया खानदान से आती हैं वो पेशवाओं की नौकरी किया करते थे और उनका शाही खानदार से कोई मुकाबला नहीं है। साल 2001 के जून के महीने की पहली तारीख। राजमहल में परिवारिक डिनर का आयोजन किया गया था। शाम ढलते ही दीपेंद्र ने नशा करना आरंभ कर दिया था और रात होते-होते महल का माहौल एकदम से बदल गया जब दीपेंद्र ने हाथों में बंदूक लिए गुस्से में अपने परिवार के लोगों को गोलियों का निशाना बनाने लगा। एक-एक कर राजकुमार दीपेंद्र ने अपने पिता राजा बीरेंद्र, मां ऐश्वर्य समेत नौ लोगों की हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। इस सनसीखेज हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। नेपाल की राजधानी काठमांडू के बादमती तट पर चंदन की लकड़ियों में राजा बीरेंद्र वीर विक्रम शाहदेव की चिता सजी थी। इसके साथ ही रानी ऐश्वर्य, राजकुमारी श्रुति, राजकुमार निरंजन और शाही परिवार के अन्य सदस्यों के शव थे। पूरा नेपाल रो रहा था साथ ही नारे लग रहे थे ‘हाम्रौ राजा हाम्रो देख प्राण से भन्दा प्यारा छ’ यानी की हमारे राजा और हमारा देश हमें जान से भी ज्यादा प्रिय है। 

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