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Strait of Hormuz पर जंग की आहट! कूटनीतिक प्रयासों के बीच अमेरिका ने सैनिक भी बढ़ाए, Iran ने दी खुली चेतावनी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और आर्थिक टकराव तेज हो गया है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हाल के घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय व्यापक संघर्ष का रूप ले सकती है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है तो ईरान हजारों अमेरिकी सैनिकों को बंधक बना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रत्येक बंधक के बदले भारी आर्थिक कीमत वसूली जाएगी। मोहसिन रजाई ने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बना सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसके आर्थिक और समुद्री अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, वह इस रणनीतिक जलमार्ग से पीछे नहीं हटेगा।
इसी बीच, अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी है। यह नाकाबंदी लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि कोई भी जहाज यदि ईरान के समर्थन में गतिविधि करेगा या अमेरिकी बलों पर हमला करेगा, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।
उधर, ईरान के विदेश मंत्री ने भी अमेरिका की कार्रवाइयों को उकसाने वाला बताते हुए चेतावनी दी है कि इसके गंभीर और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी कदम पहले से ही जटिल स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रस्ताव को एकतरफा और अविवेकपूर्ण करार दिया और चीन तथा रूस के समर्थन की सराहना की।
दूसरी ओर, तनाव के इस माहौल के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच वार्ता की संभावना बनी हुई है और अगला दौर भी इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इस दिशा में आशावाद व्यक्त किया है और कहा है कि समझौते की संभावना अभी भी मौजूद है।
हालांकि, बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके उच्च संवर्धित यूरेनियम के भविष्य को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन मूलभूत मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक स्थायी शांति स्थापित करना कठिन होगा।
इस बीच, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। तुर्की ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और रचनात्मक बातचीत जारी रखने की अपील की है। वहीं लेबनान ने भी संघर्ष को समाप्त करने के लिए युद्धविराम को वार्ता का प्रारंभिक बिंदु बताया है। लेबनान के राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि शांति वार्ता देश की संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए ही की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इजराइली बलों पर कई हमलों का दावा किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन का उपयोग किया गया, जो इस संघर्ष के तकनीकी और सैन्य विस्तार को दर्शाता है।
उधर, इस पूरे घटनाक्रम का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतें एक बार फिर सौ डॉलर प्रति बैरल के स्तर के पार पहुंच गई हैं, जबकि वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है और विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने भी चेतावनी दी है कि इस संघर्ष के कारण पहले से ही खाद्य संकट झेल रहे करोड़ों लोगों की स्थिति और खराब हो सकती है। उनका कहना है कि वर्तमान में लगभग तीस करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर देखें तो पश्चिम एशिया में स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। एक ओर जहां सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकलता है या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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