गर्मी से राहत के लिए जुलाई का महीना खास माना जाता है। क्योंकि इस दौरान कई राज्यों में बरसात की शुरुआत हो जाती है, ऐसे में मौसम भी ठंडा हो जाता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि भले ही आपको गर्मी से राहत मिले जाए। हालांकि वातावरण में बढ़ी हुई नमी यानी ह्यूमिडिटी आपके कहीं ज्यादा बड़ी समस्याएं लेकर आती है।
डॉक्टरों के अनुसार, तेज धूप वाली गर्मी से ज्यादा खतरा उमस भरी गर्मी में होता है। इसकी वजह यह है कि हवा में नमी अधिक होने से पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। जबकि तेज धूप में पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर की गर्मी बाहर निकल जाती है। लेकिन उमस के कारण शरीर ठीक से ठंडा नहीं हो पाता। इससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचे रहने के लिए इस मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना काफी पसंद होता है।
सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी जरूरी
डिहाइड्रेशन के कारण सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, लो ब्लड प्रेशर और गंभीर मालमों में किडनी पर असर दिख लाता है।
गौरतलब है कि जुलाई-अगस्त के मानसून के मौसम में वायरल संक्रमण, डायरिया और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इन बीमारियों के दौरान भी शरीर में तेजी से पानी कमी होने लगती है, इसलिए डिहाइड्रेशन का जोखिम खतरा हो सकता है। इसलिए इन दिनों सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखें।
मानसून के दिनों में डिहाइड्रेशन का खतरा
– बरसात के दौरान हवा में नमी बढ़ने से पसीना बना रहता है, लेकिन व्यक्ति को उसका एहसास कम होता है। इसी कारण से कई लोग पानी कम पीते हैं और धीरे-धीरे शरीर में पानी की कमी होने लगती है।
– उमस, संक्रमण, डायरिया और उल्टी जैसी समस्याएं भी इस मौसम में अधिक होती हैं, जो शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बढ़ाती है
कैसे पता करें कि कहीं आप भी तो नहीं हो गए डिहाइड्रेशन का शिकार?
– यदि आपका बार-बार मुंह सूख रहा है, गहरे रंग का पेशाब हो रहा है या फिर पेशाब कम हो रहा है तो शरीर में पानी कमी का संकेत हो सकता है।
– अगर आपको बार-बार सिरदर्द, थकान, चक्कर आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना भी इसका संकेत हो सकता है।
– दरअसल, शरीर में पानी की कमी बढ़ जाए तो दिल की धड़कन तेज हो सकती है, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी तक स्थिति बन जाती है।
कैसे दूर करें ये समस्या?
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं होता। शरीर को सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड जैसे जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी चाहिए। ज्यादा पसीना आने, उल्टी या दस्त होने पर ये मिनरल्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में सिर्फ पानी पीने से कमी पूरी नहीं होती। इस कमी को पूरा करने के लिए नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और मांसपेशियां व नसें सही तरीके से काम करती हैं।