वेनेजुएला के तटीय इलाके में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं, जिसने लोगों को पूरी तरह डरा दिया है। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक, अरागुआ के तट के पास समुद्र में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 30 किलोमीटर की गहराई में था। यह नया झटका ऐसे नाजुक समय पर आया है जब देश पहले से ही दो बेहद विनाशकारी भूकंपों की भयंकर मार झेल रहा है, और चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार मची हुई है।
मलबे में जिंदगी की उम्मीदें कम, 51 हजार लोग लापता
आपको बता दें कि इससे पहले बीते बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बैक-टू-बैक बड़े भूकंप आए थे, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाविपदा में अब तक लगभग 1,500 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 51,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के शुरुआती 72 घंटे बीत जाने के बाद अब मलबे से लोगों के जिंदा बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं। आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी हजारों लोग दबे हो सकते हैं, जिससे मौतों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
इसे भी पढ़ें: नक्शे से मिटा देंगे, Donald Trump की धमकी के बाद US-Iran में ताबड़तोड़ Missile Attack
इकनॉमी को तगड़ा झटका
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के शुरुआती असेसमेंट के मुताबिक, इस भयंकर आपदा से वेनेजुएला के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। कंक्रीट के मलबे में तब्दील हुई बड़ी-बड़ी इमारतों और तबाह हुई सड़कों के कारण देश को करीब 6.7 अरब डॉलर, जो कि देश की जीडीपी का लगभग 6% है, का सीधा नुकसान हुआ है। हालांकि, इस मुश्किल घड़ी में इंटरनेशनल लेवल पर मदद भी पहुंचने लगी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि अमेरिका ने तुरंत सर्च एंड रेस्क्यू टीम के साथ दवाइयां और मानवीय सहायता भेजी है।
इसे भी पढ़ें: China के 109 मंजिला ‘बुर्ज खलीफा’ से टकराया विमान, उड़ गए परखच्चे, Video
ग्राउंड जीरो पर हालात खराब
इस बीच, वेनेजुएला की कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने मुश्किल वक्त में साथ देने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और आईएमएफ की एमडी क्रिस्टालिना जॉर्जीवा को थैंक्स कहा है। लेकिन दूसरी तरफ, ग्राउंड जीरो यानी जमीन पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट पूरी तरह ठप होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में काफी दिक्कत आ रही है। वहीं, बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते स्थानीय लोग सरकार के लचर मैनेजमेंट से काफी नाराज और परेशान हैं।