📰 बलिया। बिरसा मुंडा जी की जयंती की पूर्व संध्या पर बलिया टाउन हॉल में गोष्ठी हुई। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर भी इसमें शामिल हुए।
🎤 कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि भारत के समृद्ध इतिहास में भगवाना बिरसा मुंडा का नाम एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक के रूप में अंकित है, जिन्होंने अपने जीवन को जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनकी जयंती पर भारत में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनकी शहादत और योगदान को याद करने का है, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, अनवरत संघर्ष और स्वाभिमान का उत्सव भी है।
🌟 बिरसा मुंडा जी का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्होंने बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। समाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतरमन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारंपरिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया।
📚 गोष्ठी में भाषणपाठ्यक सन्जय मिश्रा ने कहा कि बिरसा मुंडा जी ने “उलगुलान” नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। “उलगुलान” का अर्थ है ‘महान विद्रोह’। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जमींदारी और जनजातियों की पारंपरिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था।
🌍 कहा कि भगवाना बिरसा मुंडा केवला एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन जनजातीय समाज में व्याप्त कुरितियों जैसे अंध-विश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी, जातीय संघर्ष और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलायी। उन्होंने अपने अनुयायियों को शिक्षा का महत्व समझाया और उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने “बिरसाईत” नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने अपने अनुयायियों को आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
🗺️ कार्यक्रम संयोजक सुरेन्द्र सिंह, सत्येन्द्र गोड, मुन्ना खरवार, जयप्रकाश साहू, संध्या पांडे, सोनी तिवारी, नितेश मिश्रा, कृश्णा पांडे, मुंजी, अखिलेश गोड, संजय खरवार, विजय गोड, सरोज देवी, प्रमोद खरवार, प्रतीक जयसवाल, मुन्ना गोड, अंजू, गोविन्दा, दीपक खरवार आदि उपस्थित रहे। संचानल मुंजी गोड ने किया।
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