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Ballia-भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे ऋषियों की अमूल्य धरोहर है, अध्ययन और संरक्षण की जरूरत- जेनसीयू कुलपति

🌍 बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के द्वार पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रयम के आखिरी दिन सोमवार को गोष्ठी और अन्य कार्यक्रम हुए।

📚 प्रातः प्रथम सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नवाचार विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. संजीव कुमार, कुलपति, महात्मा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अति समृद्ध रही है।

🌟 बीजगणित, अंकगणित, त्रिकोणमिति, खगोलशास्त्र आदि विषयों में भारतीय ऋषियों ने जो सिद्धांत हजारों वर्ष पूर्व दे दिए, वे यूरोप द्वारा 15वीं-16वीं सदी में दिए गए। कहा कि यूरोप ने भारतीय ग्रंथों का अनुवाद किया और उसका श्रेय ले लिया।

🧠 विशिष्ट अतिथि प्रो. कमल कुमार श्रीवास्तव, सेवनिवृत्त आचार्य, डीएस कॉलेज मेरठ ने कहा कि नीम में मौजूद विटामिन रासायनिक पदार्थों के गुणों को हम प्रयोगशाला में देखते हैं। भारतीय परंपरा में यह लोक में मौजूद है। हमें इन सबका साक्ष्य एकत्र करना होगा।

🔬 अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे ऋषियों की अमूल्य धरोहर है। हमें इस परंपरा का अध्ययन और संरक्षण करना चाहिए।

🌿 इस अवसर पर जैनसियू और महात्मा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के मध्य समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर हुए। दोनों विवि मिलकर शोध, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे।

📈 विद्यार्थी एवं संकाय सदस्यों का परस्पर आदान-प्रदान किया जाएगा ताकि विशेषज्यता का लाभ सबको मिल सके। कार्यक्रयम में स्वागत डॉ. अजय कुमार चौबे, संचालन डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय एवं धन्यवाद ज्ञापन कुल सचिव एस एल पाल ने किया।

🏛️ प्रथाम सत्र में ही विश्वविद्यालिय की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का संदेश भी बताया गया जिसमें उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालिय अपने क्षेत्र में शिक्षा एवं अनुसंधान की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

📝 विश्वविद्यालिय को समाज और अकादमिक जगत के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करना चाहिए ताकि प्रदेश, राष्ट्र एवं समाज का विकास हो सके।

🌐 अपराह्न द्वितीय सत्र में व्यंजन मेला का आयोजन किया गया। छात्राओं ने आमवला, श्री अन्न के विविध व्यंजनों के 56 स्टाल लगाए और स्वाद से सहेत का संदेश दिया।

🎓 डॉ. रंजना मल्ल, एसिस्टेंट प्रोफेसर, गृह विज्ञान विभाग ने इस कार्यक्रयम का समन्वय किया।

🔍 संध्या वेला में दीपोत्सव का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालिय परिसर को 5100 दीपों से सजाया गया।

🕯️ प्राशासनिक भवन, परिक्षा भवन, अकादमिक भवन, कुलपति निवास आदि सभी भवनों के साथ मुख्य द्वार एवं सभी मार्गों को दीपमालिका से सजाया गया।

🎤 समन्वयक डॉ. प्रवीण नाथ यादव रहे। इस अवसर पर वित्त अधिकारी आनंद दुबे, सहायक कुल सचिव जितेंद्र नाथ मिश्र, शैक्षणिक निदेशक डॉ. पुष्पा मिश्रा, कुलानुशासक डॉ. प्रियंका सिंह, डीएसब्लू डॉ. अजय चौबे, डॉ. विनीत सिंह, डॉ. अनुराधा राय, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. संदीप यादव, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. रूबी, डॉ. छबी लाल आदि परिसर एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापक, प्रबन्धक, प्राचार्य, विवि के विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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